नालियों की गंदगी में छिपा है सोने का खजाना, आरा के बाजार में सुबह से शुरू हो जाती है इसकी तलाश, MP और राजस्थान के लोग भी क्यों आते हैं यहां? जानकर रह जाएंगे हैरान

नालियों की गंदगी में छिपा है सोने का खजाना, आरा के बाजार में सुबह से शुरू हो जाती है इसकी तलाश, MP और राजस्थान के लोग भी क्यों आते हैं यहां? जानकर रह जाएंगे हैरान
नालियों की गंदगी में छिपा है सोने का खजाना, आरा के बाजार में सुबह से शुरू हो जाती है इसकी तलाश, MP और राजस्थान के लोग भी क्यों आते हैं यहां? जानकर रह जाएंगे हैरान

अगर हम आपसे कहें कि गंदे नाले की गाद और कचरे से भी सोना निकाला जा सकता है, तो शायद आप यकीन न करें. लेकिन बिहार के आरा शहर में यह बिल्कुल सच है. यहां के गुदरी बाजार और जगजीवन मार्केट की नालियों और कचरे से लोग सचमुच सोना बटोरते हैं. यह कोई जादू नहीं, बल्कि सालों से चला आ रहा एक अनोखा और हैरान करने वाला कारोबार है. दरअसल, आरा का यह इलाका सोने-चांदी के गहनों का बहुत बड़ा गढ़ है. यहां दिन-रात आभूषणों को बनाने, काटने, घिसने और चमकाने का काम होता है. इस पूरी प्रक्रिया में सोने के बेहद बारीक कण हवा में उड़कर फर्श की धूल और बुरादे में मिल जाते हैं. कारीगर जब दुकान की सफाई करते हैं, तो पानी के साथ बहकर ये कण नालियों तक पहुंच जाते हैं. बस, यहीं से शुरू होता है असली खेल.

राजस्थान और एमपी से आते हैं सोने के पारखी

स्थानीय लोग तो इस काम में जुटे ही हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे दूर-दराज के राज्यों से भी लोग यहां खिंचे चले आते हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इन्हें पता है कि यहां की नालियों की मिट्टी मामूली नहीं है. वे बड़ी बारीकी से नाले की गाद और कचरे को इकट्ठा करते हैं, फिर कई रसायनों और पारंपरिक तरीकों से उसे धोकर उसमें से सोने के चमकीले कण अलग करते हैं. हालांकि, यह पूरी तरह किस्मत का खेल है. कभी हाथ में चोखा सोना लगता है, तो कभी सिर्फ मिट्टी और निराशा.

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घरों में सालभर सहेज कर रखा जाता है कचरा

इस धंधे का एक और दिलचस्प पहलू भी है. यहां के घरों में सालभर की झाड़ू से निकली धूल और बुरादे को कचरा समझकर फेंका नहीं जाता, बल्कि महिलाएं उसे सहेज कर एक कोने में रखती हैं. दिवाली के आसपास जब सफाई होती है, तो इस कचरे की बाकायदा बोली लगती है. खरीदार इस कचरे को अच्छे दामों में खरीदकर ले जाते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि इसमें सोने की चमक छिपी हो सकती है.

कमाई की कोई गारंटी नहीं, फिर भी उम्मीद

दुकानदार हो या घर की महिलाएं, हर कोई सोने के एक-एक कण की कीमत समझता है. कटिंग के दौरान उड़ने वाली धूल भी यहां सोने के भाव बिकती है. हालांकि, इस काम में मेहनत बहुत है और कमाई की कोई पक्की गारंटी नहीं होती. कई बार दिनभर कीचड़ छानने के बाद भी हाथ खाली रह जाते हैं. फिर भी, कीचड़ से सोना निकालने की यह आस और उम्मीद का अनोखा कारोबार आरा की गलियों में आज भी पूरी रफ्तार से धड़क रहा है.

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