ना बैंकर्स को खबर, ना कोई शोर! LIC ने इतनी जल्दी कैसे निपटाई 31 ह​जार करोड़ की डील?

ना बैंकर्स को खबर, ना कोई शोर! LIC ने इतनी जल्दी कैसे निपटाई 31 ह​जार करोड़ की डील?

भारत की अपनी बड़ी इंश्योरेंस कंपनी में और शेयर बेचने की योजना कोई छिपी हुई बात नहीं थी. लेकिन सरकार ने जितनी रकम जुटाई और जिस तेजी से यह डील हुई, उसने मार्केट को हैरान कर दिया. आखिरी घंटों तक जानकारी को गुप्त रखने — यहां तक कि कुछ सलाहकारों से भी — और तेजी से काम करने की वजह से सरकार LIC के शेयरों की अपनी शुरुआती बिक्री योजना से दोगुने से ज़्यादा शेयर बेच पाई और 3.3 अरब डॉलर जुटाए. यह स्टॉक एक्सचेंज के जरिए देश की सबसे बड़ी सेकेंडरी ऑफरिंग है.

ना बैंकर्स को खबर, ना कोई शोर! LIC ने इतनी जल्दी कैसे निपटाई 31 ह​जार करोड़ की डील?

इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के अनुसार, सरकारी विनिवेश विभाग के अधिकारियों ने लॉन्च की तारीख गुप्त रखी ताकि ट्रेडर सेल्स से पहले पोजीशन न ले सकें और सरकार के शेयर बेचने से पहले स्टॉक की कीमत कम न कर सकें. डील पर सलाह देने वाले बैंकों को भी अलगअलग समय पर जानकारी दी गई. एक बैंक को तो सोमवार को स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करने से कुछ समय पहले ही इस फैसले के बारे में पता चला.

सिर्फ कोर टीम को थी जानकारी

सेल्स शुरू होने से कुछ घंटे पहले, डील पर सलाह देने वाले चार बैंकरों में से एक को बिना कारण बताए नई दिल्ली में विनिवेश विभाग के ऑफिस बुलाया गया. वहां अधिकारियों ने बताया कि LIC में हिस्सेदारी की बिक्री उसी शाम शुरू होगी और बैंकर से एक्सचेंज फाइलिंग तैयार करने को कहा. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उस व्यक्ति ने बताया कि सिर्फ कोर टीम को ही इसकी जानकारी थी, बाकी सलाहकारों को मार्केट बंद होने के बाद शामिल किया गया.

यह डील इसलिए भी खास थी क्योंकि किसी भी सलाहकार ने कोई एडवाइज़री फ़ीस नहीं ली. उन्होंने बताया कि रिक्वेस्टफ़ॉरप्रपोज़ल प्रक्रिया के दौरान, एक इन्वेस्टमेंट बैंक फ्री में काम करने को तैयार हो गया, जिसके बाद चारों ने फीस न लेने का फैसला किया. भारत में इन्वेस्टमेंट बैंक अक्सर सरकारी डील में सिर्फ नाममात्र की फीस लेते हैं क्योंकि वे प्रतिष्ठा, लीगटेबल क्रेडिट और लंबे समय के संबंध बनाने की होड़ में रहते हैं.

सोच समझकर किया गया समय का चुनाव

समय का चुनाव भी बहुत सोचसमझकर किया गया था. ज्यादातर मार्केट प्लेयर्स को उम्मीद थी कि यह बिक्री LIC द्वारा गुरुवार को अपनी तिमाही कमाई की घोषणा करने के बाद ही होगी. लोगों के अनुसार, अधिकारियों ने उम्मीदों से आगे रहने के लिए इसे पहले ही कर दिया. अधिकारियों और बैंकरों का मानना ​​था कि निवेशकों को असमंजस में रखने से स्टॉक की कीमत स्थिर रखने में मदद मिलेगी.

वैसे सरकारी विनिवेश विभाग की ओर से इस मामले में कोई बयान सामने नहीं आया है. लोगों ने बताया कि अपने बैंकर्स की सलाह के बाद, सरकार ने शुरुआती 2.5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का फ़ैसला किया, साथ ही अच्छी मांग होने पर इसे 4 फीसदी और बढ़ाने का विकल्प भी रखा. उन्होंने कहा कि बेस पोर्शन छोटा होने से डील के पूरी तरह सब्सक्राइब होने की संभावना बढ़ गई, जो बड़े निवेशकों के लिए एक अहम संकेत था.

काम कर गई सरकार की ट्रिक

यह दांव काम कर गया. मंगलवार को इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने बेस पोर्शन को 3.32 गुना सब्सक्राइब किया, जिससे सरकार को ओवरसब्सक्रिप्शन वाले हिस्से को भी इस्तेमाल करने का मौका मिला. स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, बुधवार को बंद हुए रिटेल पोर्शन को 69 फीसदी सब्सक्रिप्शन मिला. कुल मिलाकर, यह ट्रांजैक्शन 1.2 गुना सब्सक्राइब हुआ. इस ट्रांज़ैक्शन के बाद LIC में पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़कर 10 फीसदी हो जाएगी, जिससे मार्केट रेगुलेटर की ज़रूरी सीमा मई 2027 की डेडलाइन से काफी पहले ही पूरी हो जाएगी.

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