Noida Unsafe Building Survey: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद नोएडा प्राधिकरण भी जर्जर और असुरक्षित भवनों को लेकर सक्रिय हो गया है. प्राधिकरण ने 81 गांव में ऐसे मकान और भवनों की पहचान के लिए सर्वे शुरू कराया है, जिनकी हालत रहने के लिहाज से खतरनाक है. सर्वे के दौरान चिन्हित भवनों पर नोटिस चस्पा किए जा रहे हैं. भवन मालिकों तथा वहां रहने वाले लोगों को मकान खाली करने के लिए एक से दो सप्ताह का समय दिया गया है.

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन इमारत में सालों से रहने वाले लोगों क्या होगा और यह लोग ऐसे में अपने परिवार को लेकर जाएंगे कहां? क्या प्राधिकरण इन्हें वैकल्पिक आवास देगा, किराए पर कहीं भेजेगा या सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराएगा? फिलहाल इन सवालों पर प्राधिकरण की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है. अधिकारियों की ओर से इतना जरूर कहा गया है की जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद से भवन खाली कराकर लोगों को सुरक्षित स्थान पर भेजा जा सकता है.
साल 2019 में भी हुआ था सर्वे
यह पहली बार नहीं है कि जब नोएडा में जर्जर इमारतों की पहचान की जा रही है. वर्ष 2019 के सर्वे में करीब 1757 इमारतों को जर्जर या असुरक्षित चिह्नित किया गया था. इनमें 56 भवन जर्जर और असुरक्षित बताए गए थे, जबकि 1326 इमारतें 3 साल से अधिक की थीं. 114 बहू मंजिलें इमारतें अनुसूची और अर्जित क्षेत्र में थीं तथा 114 ऐसी इमारतें थी, जो ध्वस्तीकरण के आदेश के बावजूद भी यह खड़ी रहीं.
उस समय कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद नोएडा प्राधिकरण ने फिर से सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज कर दी है. नोएडा प्राधिकरण को 10 वर्क सर्कल में बांटा गया है और उनके अंतर्गत 81 गांव आते हैं. सभी सर्कल अधिकारियों को अपनेअपने क्षेत्र में जर्जर भवनों की पहचान को कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है.
इन इलाकों में हैं सबसे ज्यादा ऊंची इमारतें
सदरपुर, निठारी, मामूरा, सलारपुर और भंगेल जैसी घनी आबादी वाले गांव में सर्वे चल रहा है, क्योंकि यह वही इलाका है जहां पर सबसे ज्यादा लोगों ने किराए के लिए ऊंची ऊंची इमारतें खड़ी की हैं. मामूरा में अब तक 9 भवनों पर जर्जर होने का नोटिस चस्पा किया जा चुका है, जबकि इनमें अभी भी लोग रह रहे हैं. गांव के अलावा सेक्टर 31 के 128 ईडब्ल्यूएस फ्लैटों को भी जर्जर स्थिति के कारण नोटिस जारी किए गए हैं.
प्राधिकरण का कहना है की खतरनाक भवनों को खाली कराया जाएगा, ताकि किसी भी दुर्घटना में जान माल का नुकसान ना हो, लेकिन जिन परिवारों के पास दूसरा घर नहीं है, उनके लिए दो सप्ताह में घर खाली करना आसान नहीं होगा. यही वजह है कि अब कार्रवाई के साथसाथ पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
मकान खाली करने से पहले इस सवाल का जवाब जरूरी
लोगों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन जर्जर मकान खाली करने से पहले यह बताना उतना ही जरूरी है कि इन परिवारों को सुरक्षित छत आखिर मिलेगी कहां? बता दें किसत्य निकेतन में 6 सितंबर को 5 मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हादसे के बाद देश भर में पुराने और असुरक्षित भवनों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं.