
न्यूयॉर्क: आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में आयोजित सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों, वैश्विक संस्थानों और कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन के जरिए आर्थिक अवसरों का विस्तार रहा।
सम्मेलन में केन्या के राष्ट्रपति विलियम सामोई रुटो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की प्रधानमंत्री जूडिथ सुमिनवा, विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक डॉ. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। न्गोजी ओकोंजोइवेला और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
‘शांति के बिना समृद्धि संभव नहीं’
सेमाफोर के सहसंस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जस्टिन बी. स्मिथ के साथ संवाद में गुरुदेव ने कहा कि आर्थिक विकास को आंतरिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के एक दिन बाद आयोजित सत्र में उन्होंने कहा, “समृद्धि शांति के साथ आती है। यदि शांति नहीं होगी, तो समृद्धि भी नहीं हो सकती।”
अमीरगरीब की खाई पाटने पर जोर
गुरुदेव ने कहा कि संपन्न और वंचित वर्गों के बीच की खाई लगभग हर देश में मौजूद है और अमेरिका भी इससे अछूता नहीं है। उनके मुताबिक, इस अंतर को कम करने के लिए समाज के दोनों वर्गों को अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि लोगों को “पीड़ित मानसिकता” से बाहर निकलकर अपने विकास की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। वहीं, जिन लोगों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्हें सहानुभूति और साझा करने के महत्व को समझना होगा।
गुरुदेव ने भ्रष्टाचार को भी एक बड़ी वजह बताया, जिसके कारण वैश्विक दक्षिण के कई देशों में उपलब्ध संसाधन जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाते।
500 बेरोजगार युवाओं का उदाहरण
गुरुदेव ने भारत के एक ग्रामीण क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र के आसपास रहने वाले करीब 500 बेरोजगार युवाओं का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दिए गए 200 परियोजना प्रस्तावों को युवाओं ने यह मानकर ठुकरा दिया था कि इनमें से कुछ भी काम नहीं करेगा।
इसके बाद दो महीने के एक कार्यक्रम के जरिए युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया। गुरुदेव के मुताबिक, इसके बाद युवाओं की सोच में बदलाव आया। उन्होंने बताया कि इसी मॉडल को बाद में केन्या, घाना, नाइजीरिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीका के अन्य देशों में भी अपनाया गया।
तनाव से संवाद और कारोबार पर असर
कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों पर गुरुदेव ने कहा कि तनाव संवाद की प्रक्रिया में बाधा डालता है और इसका प्रभाव कारोबारी संस्थानों पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के दौर में बेहतर तरीके से आगे बढ़ने के लिए लोगों में अपनेपन और सुरक्षा की भावना होना जरूरी है।
AI पर गुरुदेव का अनोखा जवाब
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI को लेकर जस्टिन बी. स्मिथ के सवाल पर गुरुदेव ने हल्केफुल्के अंदाज में कहा, “इंटेलिजेंस की अनुपस्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस ये तीन अवस्थाएं हैं।”
सत्र के अंत में स्मिथ ने कहा कि अगर उन्हें इन तीनों में से किसी एक को चुनना हो तो वह तीसरे विकल्प को चुनेंगे।
‘एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ पर भी काम
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ की स्थापना भी की है।