
दुनिया भर के बड़े शहरों में चलने वाली मेट्रो ट्रेनें अमूमन जमीन से कुछ ही फीट या कुछ मंजिलों की गहराई पर बनी होती हैं. लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे मेट्रो स्टेशन भी मौजूद हैं, जिन्हें बनाने के लिए इंजीनियर्स को जमीन के नीचे लगभग पाताल लोक तक जाना पड़ा. किसी शहर की कठिन भौगोलिक बनावट, गहरी नदियों की मौजूदगी, दलदल और युद्ध के समय परमाणु बंकर की जरूरतों के कारण इन स्टेशनों को जमीन से सैंकड़ों फीट नीचे बनाया गया है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इस सूची में सबसे पहला नाम आता है यूक्रेन की राजधानी कीव में स्थित ‘आर्सेनलना’ मेट्रो स्टेशन का, जो जमीन से 105.5 मीटर यानी लगभग 346 फीट की गहराई पर स्थित है. यह दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो स्टेशन माना जाता है.
आर्सेनलना स्टेशन इतना गहरा है कि अगर अमेरिका की विशालकाय ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ को इसके सीधे गड्ढे में डाल दिया जाए, तो भी ऊपर 12 मीटर यानी लगभग 40 फीट से ज्यादा की जगह खाली रह जाएगी. इस स्टेशन की गहराई का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि यहां ट्रेन पकड़ने के लिए यात्रियों को दो बड़ी-बड़ी एस्केलेटर की मदद से पाताल में उतरना पड़ता है. इन एस्केलेटर पर सफर करने में यात्रियों को लगभग 5 मिनट का लंबा समय लग जाता है. इस स्टेशन के इतने गहरे होने की मुख्य वजह नीपर नदी का किनारा और कीव शहर की पहाड़ी बनावट है. नदी के ऊंचे किनारों के कारण ट्रेन के ट्रैक को सीधा रखने के लिए स्टेशन को पहाड़ के ऊपर से 105 मीटर नीचे खोदकर बनाना पड़ा था.
दुनिया के सबसे गहरे मेट्रो स्टेशनों की सूची में दूसरा बड़ा नाम रूस के ‘सेंट पीटर्सबर्ग मेट्रो’ का आता है. सेंट पीटर्सबर्ग का ‘एडमिरलटेयस्काया’ स्टेशन जमीन से 86 मीटर की गहराई पर स्थित है. औसतन सभी स्टेशनों की गहराई के मामले में यह दुनिया का सबसे गहरा मेट्रो नेटवर्क माना जाता है. इस स्टेशन पर उतरने के लिए यात्रियों को दुनिया की सबसे लंबी एस्केलेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिसकी लंबाई 130 मीटर से भी ज्यादा है. इतनी गहराई में उतरते समय यात्रियों को ऐसा महसूस होता है, मानो वे किसी दूसरी ही दुनिया में प्रवेश कर रहे हों. रूस के इस स्टेशन को भी कठिन भूवैज्ञानिक परिस्थितियों के कारण इतनी गहराई में तैयार किया गया था.
वहीं, उत्तर कोरिया की रहस्यमयी राजधानी प्योंगयांग में बना ‘प्योंगयांग मेट्रो’ नेटवर्क भी दुनिया के सबसे गहरे मेट्रो सिस्टम का सबसे बड़ा दावेदार है. यहां की मेट्रो लाइनें जमीन से 110 मीटर से भी अधिक की गहराई पर बिछाई गई हैं. उत्तर कोरिया के केवल दो स्टेशनों पुहुंग और योंगवांग में ही विदेशी पर्यटकों को जाने की अनुमति दी जाती है. प्योंगयांग मेट्रो में नीचे उतरने के लिए एस्केलेटर पर सफर करते समय पुराने लाउडस्पीकरों से देशभक्ति और क्रांति के गाने गूंजते रहते हैं. इतनी ज्यादा गहराई पर होने के कारण प्योंगयांग का यह मेट्रो स्टेशन किसी भी परमाणु हमले या बमबारी के समय एक अभेद्य ‘बॉम्ब शेल्टर’ यानी परमाणु बंकर का काम करता है.
अत्यधिक गहराई में होने के कारण प्योंगयांग मेट्रो स्टेशन का तापमान साल के बारह महीने एक समान यानी 18 डिग्री सेल्सियस बना रहता है, चाहे बाहर कितनी भी कड़ाके की ठंड या गर्मी क्यों न हो. इन प्रसिद्ध स्टेशनों के अलावा अमेरिका के ऑरेगॉन में स्थित ‘वाशिंगटन पार्क’ स्टेशन 79 मीटर गहरा है, जो उत्तरी अमेरिका का सबसे गहरा स्टेशन है. वहीं, लंदन अंडरग्राउंड का ‘हैम्पस्टेड’ स्टेशन 58.5 मीटर और चेक गणराज्य के प्राग मेट्रो का ‘नामस्ती मीरू’ स्टेशन 53 मीटर की गहराई पर बने हुए हैं. ये सभी मेट्रो स्टेशन आज न सिर्फ परिवहन का जरिया हैं, बल्कि इंजीनियरिंग का एक नायाब और हैरतअंगेज नमूना भी बन चुके हैं.