पार्टनर्स तैयार, फिर क्यों थमी रफ्तार? देश के सबसे पुराने चिप प्लांट के रिवैंप पर सस्पेंस बरकरार

पार्टनर्स तैयार, फिर क्यों थमी रफ्तार? देश के सबसे पुराने चिप प्लांट के रिवैंप पर सस्पेंस बरकरार

देश में लगातार सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने बात कही गई. जिसके लिए तेजी के साथ प्रयास भी किए गए.बावजूद इसके भारत का सबसे पुराना एक मात्र सरकारी चिप प्लांट अपने कायाकल्प का इंतजार कर रहा है. ये प्लांट करीब 4 दशक पहले आग लगने की वजह से बर्बाद हो गया था. जिसे फिर से शुरू करने का प्लान बनाया गया था. लेकिन बीते 6 महीने से सिर्फ प्लानिंग के लेवल पर ही अटका हुआ. अभी तक इसको शुरू करने की प्लानिंग को मंजूरी नहीं मिली है. सरकारी अधिकारियों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बताया कि मोहाली में सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी को मॉडर्न बनाने के लिए सरकार द्वारा तीन प्राइवेट कंपनियों को चुने जाने के छह महीने बाद भी, यह प्रोजेक्ट जरूरी मंजूरी और दूसरे फैसलों का इंतजार कर रहा है.

पार्टनर्स तैयार, फिर क्यों थमी रफ्तार? देश के सबसे पुराने चिप प्लांट के रिवैंप पर सस्पेंस बरकरार

4 दिसंबर 2025 को, टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, साइएंट सेमीकंडक्टर्स और एप्लाइड मैटेरियल्स, SCL के 4,500 करोड़ रुपए के मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए पसंदीदा बोली लगाने वाली कंपनियों के तौर पर सामने आईं. इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले चार अधिकारियों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के साथ मिंट की रिपोर्ट में कहा कि सेमीकंडक्टर बनाने वाले प्लांट को फिर से शुरू करने के भारत के इरादों पर कई तरह की बातें असर डाल रही हैं. एक अधिकारी ने बताया कि इनमें से एक वजह यह है कि इस प्रस्ताव के लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी की जरूरत होगी.

मंजूरी की प्रक्रिया से सीधे जुड़े एक और सीनियर अधिकारी ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि सरकार कैबिनेट की मंजूरी के लिए जरूरी कागजात जमा करने की प्रक्रिया में है. अधिकारी ने कहा कि दिसंबर में बोली लगाने वाली कंपनियों का चयन टेंडर प्रोसेस को पूरा करने के लिए किया गया था. अब हम मंजूरी के लिए कैबिनेट को जरूरी आवेदन जमा करने की प्रक्रिया में हैं, हालांकि उन्होंने इसके लिए कोई समयसीमा नहीं बताई. तीसरे अधिकारी ने कहा कि SCL प्रोजेक्ट को जरूरी कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए यह मंजूरी बहुत जरूरी है.

SCL की शुरुआत और एक रहस्यमयी आग

हालांकि भारत अब इस सेक्टर में आगे निकलने की पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन SCL मोहाली की स्थापना 1984 में ही हो गई थी—यानी दुनिया की दिग्गज कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के बनने से पूरे तीन साल पहले. इस प्रोजेक्ट का मकसद देश को एशिया में उभर रही सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बनाना था, क्योंकि उस समय पर्सनल कंप्यूटिंग के दौर में इंटेल, IBM, फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स जैसी अमेरिकी दिग्गज कंपनियां चिप्स बनाने की होड़ में लगी हुई थीं. लेकिन, 1989 में लगी एक रहस्यमयी आग ने SCL की ज्यादा मशीनरी को बर्बाद कर दिया, और यह फैब यूनिट कभी भी अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंच पाई.

2023 में, केंद्र सरकार ने SCL मोहाली को फिर से शुरू करने, उसे आधुनिक बनाने और उसका विस्तार करने के लिए लगभग 10,000 करोड़ रुपए देने की घोषणा की. हालांकि अब तक हुए कुल खर्च के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि 4,500 करोड़ रुपए की राशि इसी घोषित बजट का हिस्सा होगी.

मामला कहां अटका है?

इंडस्ट्री के एक एग्जीक्यूटिव ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि कॉन्ट्रैक्ट जारी करने में देरी की एक मुख्य वजह केंद्र सरकार का वह रुख है जिसमें वह मॉर्डनाइजेशन के अलावा, मौजूदा SCL मोहाली फैसिलिटी को बढ़ाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट्स के एक दूसरे, अलग सेट को कैसे संभालेगी, इस पर विचार कर रही है. इससे पहले मीडिया रिपोर्ट में ये बात सामने आई थी कि यह मामला तब एक बड़ी चुनौती बन गया जब जमीन के आवंटन और कीमत को लेकर पंजाब राज्य सरकार के साथ केंद्र की बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी.

ऊपर बताए गए इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव ने कहा कि जमीन के टुकड़े के आवंटन पर आम सहमति बनाने, साथ ही विस्तार के लिए कॉन्ट्रैक्ट कैसे जारी किए जाएंगे और क्या टेंडर की प्रक्रिया मॉर्डनाइजेशन प्रोसेस के लिए चुनी गई प्राइवेट कंपनियों के साथ टकरा सकती है, इन मुद्दों पर अभी बातचीत होनी बाकी है, जिसकी वजह से प्राइवेट कंपनियों के लिए इस पर काम शुरू करने की क्षमता रुकी हुई है.

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

43 साल पुरानी सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट के मॉर्डनाइजेशन में यह देरी ऐसे समय में हो रही है जब भारत सरकार की सेमीकंडक्टर इंसेंटिव योजना के दूसरे फेज के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपए का नया बजट आवंटित करने के प्रोसेस में है. उम्मीद है कि 2026 के आखिर तक नोटिफाई होने वाला ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ देश में सेमीकंडक्टर की पूरी वैल्यू चेन बनाने में इंडस्ट्री को आर्थिक मदद देगा.

मामले की जानकारी रखने वाले दूसरे इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव ने कहा कि पसंदीदा बोलीदाताओं के तौर पर चुनी गई कंपनियां पहले से ही SCL के साथ बातचीत कर रही हैं. हालांकि, काम में तेजी लाने के लिए एक अंतिम आदेश की जरूरत होगी ताकि उन्हें भी स्पष्टता मिल सके और वे जरूरी कैपिटल एक्सपेंडिचर कर सकें. उन्होंने आगे कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय शायद SCL प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले कैबिनेट से मिशन के तहत अगले प्रोजेक्ट बजट के मंजूर होने का इंतजार कर रहा हो.

क्या है अपग्रेड प्लान?

फरवरी में, SCL ने अपनी मौजूदा 180 नैनोमीटर फैब्रिकेशन लाइन को बेहतर बनाने के लिए बोलियां मंगवाई थीं. असल में, आजकल के चिप्स 2nm पर बनाए जाते हैं, जबकि घरेलू उपकरणों में 28nm और 100nm के बीच बने चिप्स का इस्तेमाल होता है. नैनोमीटर जितना कम होगा, चिप्स उतने ही छोटे, तेज और कम बिजली की खपत वाले होंगे.

180नैनोमीटर प्रोसेस चिप बनाने की एक पुरानी टेक्नोलॉजी है, जिसका इस्तेमाल आज भी सैटेलाइट, स्पेस और डिफेंस सिस्टम, मेडिकल डिवाइस, माइक्रोकंट्रोलर, पावर मैनेजमेंट वगैरह के लिए चिप्स बनाने में किया जाता है. चिप बनाने में, नैनोमीटर से चिप पर मौजूद ट्रांजिस्टर जैसे छोटे हिस्सों और उनके बीच की जगह का साइज मापा जाता है.

मौजूदा फैब को बेहतर बनाने में दशकों पुराने उपकरणों को बदलना शामिल है. यह बदलाव बहुत जरूरी है, क्योंकि SCL मोहाली से उम्मीद है कि वह देश की चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और पैकेजिंग की सुविधाएं देगा. आज, सिर्फ़ 180nm चिप्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां ही SCL की सुविधा का लाभ उठा सकती हैं, जिससे इसका रणनीतिक महत्व सीमित हो जाता है. अपने टेंडर में, SCL मोहाली ने कहा कि इसका एक मुख्य मकसद चिप बनाने की क्षमता को दोगुना करना है—यानी इसे 700 WSPM से बढ़ाकर 1,500 WSPM करना है.

क्या होगा तीनों कंपनियों का रोल?

चुने गए तीन बोलीदाताओं में से हर एक ने आधुनिकीकरण योजना के अलगअलग विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों के लिए आवेदन किया है. टाटा सेमीकंडक्टर मौजूदा सुविधाओं और बुनियादी ढांचे का आकलन करेगा, कमियों की पहचान करेगा, जरूरी अपग्रेड का सुझाव देगा और उपकरणों को लगाने, बदलने और उनके रखरखाव का काम संभालेगा. साइएंट अलगअलग सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने के लिए टेक्नोलॉजी देगा, जबकि एप्लाइड मैटेरियल्स प्लांट को चलाने और मैनेज करने के लिए सॉफ्टवेयर और ऑटोमेटेड सिस्टम देगा.

इस बीच, इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना ​​है कि देरी मुख्य रूप से प्रशासनिक कारणों से हो रही है, और इसका मतलब यह नहीं है कि प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. इंडस्ट्री बॉडी ‘इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन’ के प्रेसिडेंट अशोक चंडक ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि SCL मोहाली “रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण बना हुआ है, और केंद्र सरकार का इरादा इस सुविधा का इस्तेमाल देश में ही चिप डिजाइन और पेटेंट तैयार करने के लिए करना है.

चंडक ने आगे कहा कि SCL मोहाली रिसर्च, चिप्स के एक्सपेरिमेंटल टेपआउट और ट्रायल मैन्युफैक्चरिंग के लिए सिर्फ विदेशी और प्राइवेट चिप मेकर्स पर भारत की निर्भरता को कम करेगा. देरी सिर्फ प्रशासनिक है, और टेक्नोलॉजी के सेक्टर में सरकारी प्रोत्साहन के लिए यह प्रोजेक्ट शीर्ष प्राथमिकता बना रहना चाहिए.

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