पुरी। ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है। हादसे में 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। शाम 5 बजे पहांडी रस्म के दौरान भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए अचानक लोग रथों के पास जाने लगे।

यात्रा रूट पर मौजूद वॉलेंटियर लोगों को पीछे हटा रहे थे। तभी लोग एकदूसरे को धक्का देने लगे, इससे भगदड़ मच गई। लोग एकदूसरे पर गिरने लगे।
पुरी में इस समय तेज बारिश हो रही है। इसके बावजूद 10 लाख से ज्यादा लोग यात्रा रूट पर मौजूद हैं। यात्रा मुख्य मंदिर से 3km दूर बने गुंडीचा मंदिर तक जाएगी।
पुरी में पहले भी हो चुके हैं भगदड़ जैसे हादसे
18 जुलाई 2015: नवकलेवर वर्ष होने के कारण जगन्नाथ रथ यात्रा में लाखों श्रद्धालु पहुंचे थे। भगवान बलभद्र का रथ खींचे जाने के दौरान ग्रैंड रोड के मारिचिकोट चौक के पास अचानक भीड़ बढ़ गई। लोग एकदूसरे पर गिरने लगे और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। दम घुटने से 2 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हुए।
29 जून 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के बाहर सरधाबली इलाके में तड़के हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए जुटे थे। इसी दौरान भीड़ एक साथ आगे बढ़ने लगी। लोग एकदूसरे पर गिर पड़े, जिससे भगदड़ मच गई। हादसे में 3 श्रद्धालुओं की मौत हुई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए। घटना के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए और लापरवाही के आरोप में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की।
1954: प्रयागराज कुंभ मेला, यूपी, मौतें: 800+कारण: मौनी अमावस्या पर भारी भीड़ थी। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और PM जवाहरलाल नेहरू के आने की वजह से भीड़ बेकाबू हुई।
2005: मंधरदेवी मंदिर, महाराष्ट्र, मौतें: 300+ कारण: वार्षिक मेले के दौरान हादसा हुआ। नारियल फोड़ने के बाद फैला पानी और तेल सीढ़ियों पर फिसलन का कारण बना।
2008: चामुंडा देवी मंदिर, राजस्थान, मौतें: 224कारण: नवरात्रि के पहले दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर के प्रवेश मार्ग पर बम होने और दीवार गिरने की अफवाह फैली।
2008: नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश, मौतें: 162कारण: सावन मेले के दौरान पहाड़ी से भूस्खलन और चट्टान गिरने की अफवाह फैली।
2024: हाथरस सत्संग, यूपी, मौतें: 121 कारण: सूरजपाल उर्फ ‘भोले बाबा’ के सत्संग के बाद श्रद्धालु बाबा के काफिले के पीछे दौड़ पड़े। सड़क संकरी होने से अफरातफरी मची।