पुरी रथ यात्रा के चौथे दिन क्यों तोड़ा जाता है रथ का पहिया? जानें मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी ये अनोखी परंपरा

पुरी रथ यात्रा के चौथे दिन क्यों तोड़ा जाता है रथ का पहिया? जानें मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी ये अनोखी परंपरा

हर साल पुरी की रथ यात्रा शुरू होने के चौथे दिन भगवान जगन्‍नाथ के रथ का पहिया टूट जाता है. यह कोई हादसा नहीं है, बल्कि ‘हेरा पंचमी’ की एक सदियों पुरानी शुभ परंपरा है. जिसके तहत भगवान के रथ का पहिया प्रतीकात्‍मक रूप से तोड़ा जाता है. इस साल 16 जुलाई 2026 को रथ यात्रा प्रारंभ हुई और 20 जुलाई 2026 को पहिया तोड़ने की ये रस्‍म निभाई जाएगी. पुरी में भगवान जगन्‍नाथ की रथ यात्रा को लेकर 1 महीने तक ढेर सारी रस्‍में निभाई जाती हैं और विशेष अनुष्‍ठान होते हैं. जिसमें हेरा पंचमी की रस्‍म भी बेहद अहम है, जिसका संबंध मां लक्ष्‍मी से है.

पुरी रथ यात्रा के चौथे दिन क्यों तोड़ा जाता है रथ का पहिया? जानें मां लक्ष्मी की पूजा से जुड़ी ये अनोखी परंपरा

माता लक्ष्‍मी ने गुस्‍से में तोड़ दिया था रथ
पौराणिक कथाओं और पुरी में प्रचलित धार्मिक मान्‍यता के अनुसार, एक बार देवी लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से गुस्सा हो गई थीं. जिसे लेकर हेरा पंचमी की यह रस्‍म निभाई जाती है. दरअसल, जब भगवान जगन्‍नाथ रथ यात्रा के लिए अपने भाई बहन के साथ जाते हैं तो वह लक्ष्मी जी से वादा करते हैं कि वो जल्द ही वापस लौट आएंगे. लेकिन, गुंडिचा मंदिर अपनी मौसी के यहां पहुंचने पर वह वहीं ठहर जाते हैं.

जब 3 दिन बीत जाने पर भी भगवान जगन्‍नाथ वापस अपने मंदिर नहीं लौटते हैं तो लक्ष्मी जी गुस्सा हो जाती हैं. वे पालकी में विराजमान होकर गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं, लेकिन उनकी मुलाकात भगवान जगन्‍नाथ से नहीं हो पाती है. ऐसे में वे नाराज हो जाती हैं और उनके रथ नंदीघोष का पहिया तोड़ देती हैं. ताकि रथ आगे न बढ़ पाए.

जैसे ही भगवान जगन्‍नाथ को इस बात का पता चलता है, वे आकर लक्ष्‍मी जी को मनाते हैं और जल्‍द वापस आने का वादा करते हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। यह घटना आषाढ़ शुक्‍ल पंचमी तिथि के दिन होती है. इसलिए इसे हेरा पंचमी कहते हैं. साथ ही हर साल हेरा पंचमी के दिन भगवान के नंदीघोष रथ का पहिया प्रतीकात्‍मक तौर पर थोड़ा सा तोड़ दिया जाता है. इसके बाद मां लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है. यह रस्‍म पुरी के जगन्‍नाथ मंदिर के पुजारियों और सेवायतों द्वारा संपन्‍न कराई जाती है.

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