
राजस्थान में एचआईवी संक्रमण से पीड़ित करीब 70 हजार से अधिक लोग 1,250 रुपये की मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए दस्तावेजों की प्रक्रिया में उलझे हुए हैं. मरीजों का कहना है कि पेंशन के लिए उन्हें बार-बार दस्तावेज और सहमति पत्र उपलब्ध कराने पड़ रहे हैं. इससे न केवल अनावश्यक परेशानी बढ़ रही है, बल्कि एचआईवी से जुड़ी जानकारी की गोपनीयता को लेकर भी चिंता बनी हुई है.
राजस्थान स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी की ओर से पेंशन प्रक्रिया के लिए शपथ पत्र के साथ आधार, जन आधार, बैंक पासबुक और जाति प्रमाण-पत्र सहित विभिन्न दस्तावेज मांगे जा रहे हैं. मरीजों का दावा है कि कई मामलों में एक ही प्रक्रिया के लिए 15 से 20 बार तक कागजात जमा कराने पड़ रहे हैं. इससे उन्हें दो से तीन हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है.
नियमित इलाज पर भी पड़ रहा असर
एचआईवी संक्रमित मरीजों के लिए नियमित दवा लेना बेहद महत्वपूर्ण है. मरीजों का कहना है कि पेंशन की प्रक्रिया में बार-बार चक्कर लगाने और दस्तावेज जुटाने की परेशानी का असर उनके नियमित इलाज पर भी पड़ रहा है. उनका आरोप है कि हर महीने पेंशन शुरू होने की उम्मीद जताई जाती है, लेकिन कई मामलों में भुगतान नहीं हो पाता.
रिपोर्ट के अनुसार, सीकर जिले में ही एक वर्ष के दौरान 107 एचआईवी संक्रमित मरीज दवा छोड़ने की स्थिति में पहुंच चुके हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक नियमित रूप से दवा नहीं लेने पर मरीजों को इलाज की दूसरी लाइन में जाना पड़ सकता है और गंभीर स्थिति में जान का खतरा भी बढ़ सकता है.
मरीजों से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि एचआईवी संक्रमित लोगों की पहचान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अत्यंत संवेदनशील होती है. ऐसे में पेंशन के लिए बार-बार दस्तावेज मांगने के बजाय उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए. विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कौन-कौन से दस्तावेज अनिवार्य हैं और उन्हें कितनी बार जमा करना होगा.
राजस्थान एड्स कंट्रोल सोसायटी से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि पेंशन के लिए बजट स्थानांतरित किया जा चुका है. अब प्रदेश के एआरटी केंद्रों से लाभार्थियों का डेटा लिया जा रहा है. जिन लाभार्थियों के डेटा में किसी प्रकार की गड़बड़ी या मिसमैच मिल रहा है, उसे सुधार के लिए संबंधित केंद्र को वापस भेजा जा रहा है.
इन जिलों में दवा छोड़ने के मामले
अगस्त 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों में अजमेर में 117, अलवर में 115, बांसवाड़ा में 66, बाड़मेर में 29, भरतपुर में 38, भीलवाड़ा में 216, चूरू में 9, झुंझुनूं में 30 और सीकर में 79 मरीजों के दवा छोड़ने के मामले दर्ज किए गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि इलाज से जुड़े मामलों में नियमित फॉलोअप और मरीजों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना महत्वपूर्ण है.
एक्सपर्ट के अनुसार, एचआईवी संक्रमित लोगों के लिए पेंशन प्रक्रिया का स्पष्ट आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए. बार-बार दस्तावेज मांगने की व्यवस्था को समाप्त कर उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर प्रक्रिया पूरी करने तथा मरीजों का नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने की जरूरत है.