प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में अनोखा भंडारा, प्रसाद के रूप में बांटे गए बेल, शमी और तुलसी के पौधे

प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में अनोखा भंडारा, प्रसाद के रूप में बांटे गए बेल, शमी और तुलसी के पौधे
प्रयागराज के बड़े हनुमान मंदिर में अनोखा भंडारा, प्रसाद के रूप में बांटे गए बेल, शमी और तुलसी के पौधे

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक अनोखे भंडारे का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं को भोजन नहीं बल्कि पौधों का प्रसाद वितरित किया गया। संगम तट स्थित प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान मंदिर में आयोजित इस विशेष पहल के तहत दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को निशुल्क बेल, शमी और तुलसी के पौधे दिए गए।

धार्मिक भंडारे की तर्ज पर हुआ पौधों का वितरण

प्रयागराज की कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह धार्मिक पर्वों पर अन्न क्षेत्र और भंडारे आयोजित किए जाते हैं, उसी सोच के साथ मंदिर में पौधों का भंडारा शुरू किया गया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु जब मंदिर के महंत से पौधा प्राप्त करते हैं तो उसे प्रसाद के रूप में स्वीकार करते हैं और उसकी देखभाल का संकल्प भी लेते हैं।

श्रद्धालुओं को दिए गए धार्मिक महत्व वाले पौधे

इस विशेष भंडारे में श्रद्धालुओं को तीन प्रमुख पौधे बेल का पौधा, शमी का पौधा और तुलसी का पौधा वितरित किया गया। इन पौधों का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व भी बताया गया। मंदिर प्रशासन का कहना है कि पौधे घरों में लगाए जाने के बाद लंबे समय तक लोगों को लाभ पहुंचाएंगे और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेंगे।

सावन से पहले शुरू की गई विशेष पहल

श्री बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी महंत बलवीर गिरी ने बताया कि सावन का महीना शुरू होने वाला है और इसी अवसर पर पौधों के भंडारे की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा भंडारा है, जिसका लाभ व्यक्ति को जीवनभर मिलता रहेगा, क्योंकि पेड़पौधे लोगों को शुद्ध हवा और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।

बेल, शमी और तुलसी का है धार्मिक महत्व

महंत बलवीर गिरी ने बताया कि श्रद्धालुओं को दिए जा रहे तीनों पौधों का धार्मिक महत्व है। बेलपत्र और शमी भगवान शिव को प्रिय माने जाते हैं, जबकि तुलसी का पौधा भगवान हनुमान जी को प्रिय है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लोगों के बीच पेड़पौधों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा मंदिर

बड़े हनुमान मंदिर की यह पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि श्रद्धालु इन पौधों की देखभाल करेंगे और अपने घरों में हरियाली बढ़ाने में योगदान देंगे।

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