साइबर अपराधों का दायरा देश भर में लगातार फैलता जा रहा है, जिससे आम नागरिकों की गाढ़ी कमाई खतरे में पड़ गई है। हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक बड़े पैन इंडिया साइबर इन्वेस्टमेंट फ्रॉड नेटवर्क का सफलतापूर्वक पर्दाफाश करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह संगठित गिरोह फर्जी ट्रेडिंग ऐप और आईपीओ आवंटन के नाम पर लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर उनके साथ बड़ी ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और पंजाब में एक साथ छापेमारी कर इन शातिर अपराधियों को दबोचने में कामयाबी हासिल की है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी एनसीआरपी पर दर्ज शिकायतों के आधार पर इस पूरे नेटवर्क द्वारा 15 करोड़ 71 लाख रुपये से अधिक की ठगी किए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।

इस पूरे मामले की शुरुआत दक्षिणपश्चिम जिले की पालम कॉलोनी के रहने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर हुई थी, जिसने पुलिस को बताया कि उसके साथ फर्जी ट्रेडिंग ऐप और आईपीओ के नाम पर 4 लाख 82 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसएचओ प्रवेश कौशिक की देखरेख में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, व्हाट्सएप ग्रुप्स और बैंक खातों में पैसों के लेनदेन यानी मनी ट्रेल की बारीकी से जांच शुरू की। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जांच के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि यह गिरोह फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते और म्युल अकाउंट्स खोलकर ठगी की गई रकम को इन खातों में ट्रांसफर करता था और फिर उसे घुमाता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह गैंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेषकर व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों को फर्जी इन्वेस्टमेंट लर्निंग के नाम पर जोड़ता था और खुद को बाजार का बड़ा एक्सपर्ट बताता था। इसके बाद पीड़ितों को एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड कराया जाता था, जिस पर उन्हें निवेश पर झूठा और बड़ा मुनाफा दिखाया जाता था ताकि उनका भरोसा जीता जा सके। जब पीड़ित लालच में आकर अपना पैसा वापस निकालने का प्रयास करते थे, तो शातिर ठग उनसे टैक्स, ब्रोकरेज और आईपीओ अलॉटमेंट के नाम पर और अधिक पैसों की मांग करते थे और इस प्रकार उन्हें पूरी तरह से ठग लिया जाता था। इस देशव्यापी रैकेट के खुलासे के बाद दिल्ली में दर्ज 7 मामलों में लगभग 2 करोड़ 70 लाख रुपये की ठगी का आधिकारिक तौर पर पता चला है।
पुलिस द्वारा की गई ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए 9 आरोपियों की पहचान जमालुद्दीन फैसल, मुजमिल तैयब, शोएब दिलावर सैयद, सिद्दीकी मोहम्मद सिद्दीक मुफीदभाई, शेख रियाजुद्दीन इम्तियाज, कमलशा कादरशा, हमजा हुमायूं, सरबजीत सिंह और सोनिया शर्मा के रूप में की गई है। इन सभी को चार अलगअलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया है, जो इस फ्रॉड नेटवर्क के विभिन्न हिस्सों को संचालित कर रहे थे। इस तरह के साइबर अपराधों की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल वर्ष 2025 के दौरान अकेले दिल्ली में साइबर क्राइम के 4,003 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें लगभग 850 करोड़ रुपये की भारीभरकम धोखाधड़ी हुई थी। इन मामलों में दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 3,544 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और करीब 112 करोड़ 76 लाख रुपये की राशि बरामद करने में सफलता प्राप्त की थी।
दक्षिण दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी द्वारा लोकसभा में गृह मंत्रालय से इस विषय पर पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में मंत्रालय ने सदन को अवगत कराया था कि देश भर में साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय साइबर समन्वय केंद्र यानी आई4सी की स्थापना की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर देश भर में अब तक 32 लाख 80 हजार से अधिक शिकायतों का निवारण किया गया है और 11,158 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि को ठगों के चंगुल से बचाया गया है। पुलिस की यह ताजा कार्रवाई दर्शाती है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां डिजिटल ठगों के खिलाफ कितनी मुस्तैदी से काम कर रही हैं, लेकिन आम नागरिकों को भी ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले लुभावने प्रस्तावों के प्रति अत्यधिक सतर्क और सावधान रहने की आवश्यकता है।