बदायूं में चेकिंग कर रहे सिपाही पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश, जान बचाकर भागा पुलिसवाला!

बदायूं में चेकिंग कर रहे सिपाही पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश, जान बचाकर भागा पुलिसवाला!
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इस पूरी वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है. हालांकि इस घटना को महज एक चालक की दबंगई मान लेना काफी नहीं होगा. क्योंकि इसी पशु बाजार में पुलिसकर्मियों की साठगांठ और पशु क्रूरता के मामले में हाल ही में एक दरोगा और सिपाही को निलंबित किया जा चुका है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर सहसवान में खाकी का खौफ खत्म क्यों हो रहा है?

जान बचाकर भागा सिपाही, मची अफरातफरी

घटना सहसवान थाना क्षेत्र के तकिया इलाके में लगने वाले साप्ताहिक पशु बाजार की है जहां हर गुरुवार को बड़े पैमाने पर पशुओं की खरीद-फरोख्त होती है और सैकड़ों वाहन पहुंचते हैं. चेकिंग में तैनात सिपाही तनुज ने जब संदिग्ध अवस्था में पशुओं से लदे एक कैंटर को रोकने का प्रयास किया तो चालक ने सिपाही को कुचलने की नीयत से वाहन की गति बढ़ा दी. अचानक पैदा हुए खतरे को देखकर सिपाही ने सूझबूझ दिखाई और पीछे भागकर अपनी जान बचाई. घटना के वक्त मौके पर भगदड़ जैसा माहौल बन गया.

सस्पेंड हो चुके हैं दो पुलिसकर्मी

यह पहला मौका नहीं है जब सहसवान का यह पशु बाजार सुर्खियों में आया है. कुछ दिन पहले ही एक पशु प्रेमी की शिकायत पर ओवरलोड पशुओं से भरा कैंटर पकड़ा गया था जिसमें एक पशु की मौत हो गई थी. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। आरोप लगा था कि गंभीर मामला होने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने सांठगांठ कर कैंटर को बिना सख्त कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया.

कार्रवाई का नहीं दिखा असर

जांच में आरोप सही पाए जाने पर उच्चाधिकारियों ने एक दरोगा और एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया था. इसके बावजूद उसी जगह पर खाकी वर्दी के सामने कैंटर चालक द्वारा ऐसा दुस्साहस करना कई गंभीर सवाल खड़े करता है.

मामला तूल पकड़ने के बाद जिला पुलिस प्रशासन हरकत में आया है. एसपी देहात, हृदेश कठेरिया ने बताया कि ‘सहसवान में कैंटर चालक द्वारा आरक्षी पर वाहन चढ़ाने की कोशिश का मामला संज्ञान में आया है. आरोपी चालक के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगा दी गई है और जल्द ही उसे हिरासत में लिया जाएगा.’

खाकी का घटता खौफ या व्यवस्था की नाकामी?

चालक की गिरफ्तारी तो तय है. लेकिन यह घटना पुलिस तंत्र पर कुछ बुनियादी सवाल छोड़ती है.

क्या पहले हुई निलंबन की कार्रवाई का स्थानीय स्तर पर कोई असर नहीं हुआ?

क्या अवैध पशु परिवहन और तस्करी में लगे सिंडिकेट के भीतर से पुलिस का डर पूरी तरह खत्म हो चुका है?

क्या पशु बाजार के संचालन और वाहनों की आवाजाही में कोई ऐसा लूपहोल है जिसका फायदा यह बेखौफ चालक उठा रहे हैं?

स्थानीय लोगों का मानना है कि जब तक इस पशु बाजार में नियमों की सख्त अनदेखी और अवैध परिवहन पर नकेल नहीं कसी जाएगी, तब तक पुलिसकर्मियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था दोनों दांव पर लगी रहेंगी.

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