
गुजरात। गुजरात पुलिस ने एक बड़े अंतर-राज्यीय ईमेल नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 2 संदिग्धों लोगों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क साल 2022 से सक्रिय था और इसके जरिए 5 लाख से अधिक फेक जीमेल अकाउंट संचालित किए जा रहे थे। ये फेक अकाउंट बम की झूठी धमकियां देने और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।
पुलिस ने बताया कि, गुजरात पुलिस ने एक ऐसे शातिर आपराधिक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने सरकारी कार्यालयों को बम से उड़ाने की झूठी धमकियां देने के लिए 5 लाख से अधिक फर्जी जीमेल खाते बनाए और उनका संचालन किया। इस मामले में एक पुलिस अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि, पुलिस अब अपराधियों द्वारा सुरक्षा उपायों को बायपास करने के तरीकों का पता लगाने के लिए गूगल से आधिकारिक पूछताछ करेगी।
गुगल की जांच करेंगी गुजरात पुलिस
गुजरात पुलिस ने ईमेल गैंग के दो गुर्गों को दबोचा है। गैंग अंतर-राज्यीय स्तर पर बम की धमकियां भेज रहा था। पुलिस ने 2022 से इस्तेमाल की जा रहीं 5 लाख 13 हजार 8 सौ 47 जीमेल आईडी और पासवर्ड का पता लगाया। अब गूगल भी गुजरात पुलिस की जांच के दायरे में आ गया है। वरिष्ठ साइबर क्राइम अधिकारी विवेक भेदा ने बताया कि, अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे फेक जीमेल अकाउंट्स की संख्या बहुत ज्यादा है।
गूगल को लिखेंगे पत्र
उन्होंने ने कहा कि, गूगल को पत्र लिखेंगे और गूगल से पॉलिसी में बदलाव लाने को कहा जाएगा, जिससे अपराधी सुरक्षा उपायों को भेद ना सकें। गुजरात पुलिस जल्द गूगल को औपचारिक रूप से जांच के दायरे में शामिल करने की योजना बना रही है। गूगल से इस बारें में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन तुरंत कोई जवाब नहीं दिया गया। इससे साफ नहीं हो सका है कि, गूगल को किन कानूनी आरोपों या दंड का सामना करना पड़ सकता है।
भारत को हर साल 2 अरब डॉलर का नुकसान
आंकड़े बतलाते हैं कि, भारत में साइबर क्राइम के कारण हर साल 2 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान होता है। भारतीय एजेंसियां साइबर अपराधियों की ओर से इस्तेमाल की जा रहीं तकनीकी प्लेटफॉर्मों पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं। गुजरात पुलिस ने इस मामले में जांच तब शुरू की जब 10 सितंबर को बम की धमकी वाला ईमेल मिला यह ईमेल ब्रिक्स समिट से कुछ दिन पहले मिला था। इसमें ब्रिक्स समिट के दौरान भारत का सहयोग करने वाले देशों को भी धमकी दी गई थी। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हालांकि धमकियां झूठी निकलीं लेकिन इनकी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए।
गिरफ्तार आरोपियों में से एक बांग्लादेशी खरीदार के संपर्क में था
गिरफ्तार आरोपियों में से एक बांग्लादेश के एक खरीदार के संपर्क में था। यह खरीदार अकाउंट्स के बैच खरीदता था और नकली ईमेल भेजने के लिए क्रिप्टोकरेंसी में पेमेंट करता था। गुजरात पुलिस ने बताया कि, पुलिस के लिए चिंता की एक बात यह भी है कि हर फेक जीमेल अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल किया गया। इसे गूगल का अतिरिक्त सिक्योरिटी स्टेप माना जाता है। यह सिक्योरिटी स्टेप गूगल खातों को सुरक्षित रखने में मददगार होता है।