
बाराबंकी : रामनगर उपखंड की बिजली व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मंगलवार रात से शुरू हुई बिजली की आंखमिचौली के बाद बुधवार सुबह करीब 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक कस्बे के आधे हिस्से में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रही। करीब चार घंटे बाद जैसे ही सप्लाई बहाल हुई, रामनगरबदोसराय मार्ग पर स्थित एक विद्युत पोल में शॉर्ट सर्किट होने से अचानक आग लग गई। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई।
पोल में आग लगने से टला बड़ा हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिस समय पोल में आग लगी, उस दौरान वहां से स्कूली बच्चे, राहगीर और वाहन लगातार गुजर रहे थे। समय रहते बिजली आपूर्ति बंद करा दिए जाने से बड़ा हादसा होने से बच गया। यदि करंट प्रवाहित रहता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी।
अधिकारियों के फोन नहीं उठे, कर्मचारी ने बंद कराई सप्लाई
घटना की सूचना देने के लिए स्थानीय लोगों ने रामनगर उपखंड के अधिशासी अभियंता और एसडीओ के सीयूजी नंबरों पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया। कुछ देर बाद दोनों नंबर ‘नॉट रीचेबल’ आने लगे। बाद में एक विद्युत कर्मचारी से संपर्क होने पर बिजली आपूर्ति बंद कराई गई और स्थिति पर नियंत्रण पाया गया।
अघोषित बिजली कटौती से उपभोक्ताओं में नाराजगी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रामनगर उपखंड में अघोषित बिजली कटौती अब आम समस्या बन चुकी है। कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता घंटों बिजली बाधित रहने से परेशान हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा।
लोधेश्वर महादेवा क्षेत्र की सप्लाई पर भी उठे सवाल
क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रसिद्ध तीर्थस्थल लोधेश्वर महादेवा में 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति के सरकारी दावे भी जमीनी स्तर पर पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं। सावन मेले की तैयारियों के बीच भी बिजली व्यवस्था सुचारु नहीं हो सकी है। उमस भरी गर्मी में बारबार बिजली जाने और लंबे समय तक कटौती से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद न तो बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही अधिकारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव दिखाई दिया। लोगों ने आरोप लगाया कि आपातकालीन स्थिति में भी अधिकारियों के सीयूजी नंबर उपलब्ध नहीं रहते, जिससे दुर्घटना या तकनीकी खराबी की सूचना समय पर नहीं दी जा सकती। क्षेत्रवासियों ने विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।