
बुढ़ापे में अकेलापन कभी-कभी इंसान को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देता है, जो पूरे समाज में चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसा ही एक मामला बिहार से सामने आया, जहां 60 वर्ष से अधिक उम्र के एक बुजुर्ग और उनकी पड़ोस में रहने वाली महिला ने समाज के तानों से परेशान होकर मंदिर में शादी कर ली।
बताया जाता है कि दोनों कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे। पति-पत्नी के निधन के बाद दोनों अकेले जीवन बिता रहे थे। समय के साथ वे एक-दूसरे का सहारा बन गए और बीमारियों से लेकर रोजमर्रा के कामों तक एक-दूसरे की मदद करने लगे। धीरे-धीरे उनका साथ इतना बढ़ गया कि उन्होंने पूरी जिंदगी साथ बिताने का फैसला कर लिया।
हालांकि, गांव में दोनों के रिश्ते को लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। लगातार हो रही चर्चा और तानों से परेशान होकर दोनों ने मंदिर में सादगी से विवाह कर लिया, ताकि उनके रिश्ते को सामाजिक पहचान मिल सके।
बुजुर्ग व्यक्ति के लिए यह चौथी शादी बताई जा रही है। उनकी पहले की तीनों पत्नियों का निधन हो चुका था। उनका कहना है कि बढ़ती उम्र में अकेले रहना बेहद मुश्किल हो गया था। बेटा और परिवार अपने काम में व्यस्त रहते थे, ऐसे में पड़ोस में रहने वाली महिला ही बीमारी और जरूरत के समय उनका सबसे बड़ा सहारा बनीं।
वहीं महिला ने बताया कि पति के निधन के बाद उनका जीवन भी अकेलेपन में गुजर रहा था। परिवार से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण उन्होंने उस व्यक्ति का साथ स्वीकार किया, जो हर मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़ा रहा।
शादी के बाद जहां परिवार के कुछ लोगों ने इस फैसले पर नाराजगी जताई, वहीं गांव के कई लोगों ने दोनों का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि दो बालिग लोग अपनी इच्छा और आपसी सहमति से जीवनसाथी बनने का फैसला करते हैं, तो समाज को उनके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। आखिरकार, उम्र चाहे कोई भी हो, हर इंसान को सम्मान, अपनापन और जीवन में एक सहारे की जरूरत होती है।