ब्लड प्रेशर की दवा से क्या कैंसर होने का खतरा? WHO की चेतावनी पर जानिए एक्सपर्ट्स की राय

ब्लड प्रेशर की दवा से क्या कैंसर होने का खतरा? WHO की चेतावनी पर जानिए एक्सपर्ट्स की राय

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिसर्च यूनिट इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ने हाई बीपी, फंगल इंफेक्शन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल होने वाली दवा को कार्सिनोजेनिक बताया है. अगर बीमारी कंट्रोल करने वाली दवा से ही कैंसर का खतरा हो तो ये अपने आपने में बेहद चौंकाने वाला है. बीपी के लिए हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड, फंगल इंफेक्शन के लिए वोरिकोनाजोले और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए यूज होने वाली दवा टैक्रोलिमस का नाम इस रिसर्च में शामिल है.

ब्लड प्रेशर की दवा से क्या कैंसर होने का खतरा? WHO की चेतावनी पर जानिए एक्सपर्ट्स की राय

इन तीनों दवाओं का पूरी दुनिया में काफी इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें कार्सिनोजेनिक ग्रुप 1 में शामिल किया गया है. कहती है कि आज भारत में करीब 23 से 24 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर की चपेट में है. इस हिसाब से हर 3 में से 1 इंसान को हाइपरटेंशन की शिकायत है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। चलिए आपको बताते हैं कि हाई बीपी में ली जाने वाली इस दवा से जुड़ी जरूरी बातें….

कार्सिनोजेनिक ग्रुप 1 क्या है?

अगर किसी दवा को इस ग्रुप में शामिल किया जाता है तो इसका मतलब उसके लिए साइंटिफिक प्रूफ मौजूद है. कार्सिनोजेनिक ग्रुप में शामिल की गई इन तीनों दवाओं में ऐसे केमिकल हैं जो इंसानों में कैंसर के पनपने की वजह बन सकते हैं. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ये फैसला सिर्फ एक स्टडी के आधार पर नहीं लिया गया. इसमें पूरी दुनिया के एक्सपर्ट्स ने इंसानों पर रिसर्च, जानवरों पर परीक्षण और कई साइंटिफिक रिसर्च की समीक्षा की. इस रिसर्च को आईएआरसी मोनोग्राफ्स के वॉल्यूम 137 में पब्लिश किया गया है.

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

डॉक्टर कनिका सूद शर्मा का कहना है कि हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड लेने वाले सभी मरीजों में कैंसर का जोखिम बराबर नहीं है. इस रिपोर्ट में दवा को कार्सिनोजोनिक ग्रुप में रखा गया है लेकिन कैंसर का खतरा कुछ लोगों में हो सकता है. उन लोगों में खतरा ज्यादा है जिन्होंने इसकी डोज लाइफटाइम तक ज्यादा ली है.

एक्सपर्ट ने बताया कि सन एक्पोजर का भी इसमें खतरा हो सकता है. अगर आप धूप में ज्यादा काम करते हैं तो और आप ये दवा लेते हैं तो इससे स्किन सेंसिटिव हो जाती है. देखा जाए तो बाहर काम करने वाले या धूप में रहने वालों में कैंसर होने के चांस बन सकते हैं. पहले से स्किन कैंसर की टेनडेंसी, ट्रांसप्लांट से जुड़ी दवा लेना और सन एक्पोजर ज्यादा है तो कैंसर के होने के चांस बढ़ जाते हैं. एक्सपर्ट कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया में सन एक्सपोजर ज्यादा है इसलिए यहां कैंसर के होने का खतरा रहता है.

किन लोगों में कैंसर का खतरा ज्यादा

एक्सपर्ट कहती हैं कि स्किन के कैंसर का खतरा अधिक रहता है. एक और हिस्सा है जो धूप के सीधे संपर्क में आता है वो है होंठ. इसलिए होंठों के कैंसर के होने का डर भी बना रहता है. स्किन पर होने वाले इस बीमारी को मेडिकली बेसल सेल कार्सिनोमा पुकारा जाता है. इसके अलावा मेलोनिमाज में भी कुछ कनेक्शन देखा गया है.

खुद से दवा को बंद नहीं करना है. अपने डॉक्टर से पहले संपर्क करें. अगर तिल, मस्सा या स्किन में कोई दूसरी चीज बढ़ती हुई दिख रही हैं तो तुरंत डर्माटोलॉजिस्ट को दिखाएं. ताकि वो पता लगा सके कि ये स्किन कैंसर तो नहीं है.

भारत में इस हाई बीपी की दवा का खतरा

भारत में हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड का इस्तेमाल किया जाता है. हाइड्रोक्लोरोथियाजाइड लेने वाले ऐसे लोगों में खतरा ज्यादा चिंता का विषय हो सकता है, जो लंबे समय तक धूप में काम करते हैं, जैसे किसान और दूसरे आउटडोर वर्कर. वहीं, वोरिकोनाजोल के इस्तेमाल को लेकर भी सावधानी जरूरी है. खासकर तब, जब इसे बिना सही जरूरत या मंजूरी के कुछ फंगल इंफेक्शन में इस्तेमाल किया जा रहा हो.

घबराने की नहीं है जरूरत

डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं को लेने वाले मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है और बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए. विशेषज्ञों के मुताबिक, इन दवाओं को अचानक बंद करने के बजाय सही मरीज को सही दवा देना, डॉक्टर की निगरानी और नियमित जांच ज्यादा जरूरी है.

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