भारत का ऐसा इलाका जहां भरोसे पर टिका है कारोबार, दुकानों में नहीं बैठता कोई दुकानदार..

भारत का ऐसा इलाका जहां भरोसे पर टिका है कारोबार, दुकानों में नहीं बैठता कोई दुकानदार..

जहां आज के समय में धोखधड़ी के मामले इतने बढ़ गए हैं कि लोगों को अपनों पर भी विश्वास नहीं होता, वहीं भारत के नागालैंड में आज भी राम राज्य चल रहा है. यहां लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानों में दुकानदार के रहने की जरुरत नहीं होती. लोग अपनी जरुरत की चीजों को उठाकर स्कैनर में या कैशबॉक्स में पैसे डाल देते हैं.

भारत का ऐसा इलाका जहां भरोसे पर टिका है कारोबार, दुकानों में नहीं बैठता कोई दुकानदार..

आज कलियुग चल रहा है. राम राज्य में लोग काफी ईमानदार होते थे. उस समय चोरी, धोखेबाजी जैसी चीजें नहीं थी. लेकिन अब इसकी बस कल्पना ही की जा सकती है. लेकिन भारत के नागालैंड में आपको ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जिसके बाद लगेगा कि यहां आज भी राम राज्य चल रहा है. यहां लोग इतने ईमानदार हैं कि दुकानों में दुकानदार के रहने की जरुरत नहीं होती.

सोशल मीडिया पर नागालैंड घूमने आए कई टूरिस्ट्स इसका वीडियो बनाकर शेयर करते हैं. यहां आपको कई दुकानें मिल जाएगी, जहां सामान रखा है लेकिन कोई दुकानदार नहीं है. लोग अपनी जरुरत की चीजों को उठाकर स्कैनर में या कैशबॉक्स में पैसे डाल देते हैं. नागालैंड की यह अनोखी ईमानदारी पूरे देश के लिए मिसाल है. खासकर छोटे गांवों और कुछ शहरों की दुकानों में यह व्यवस्था आम है. पर्यटक जब यहां घूमने जाते हैं तो इस सिस्टम को देखकर हैरान रह जाते हैं/

कैसे चलती है दुकान?
यहां कई दुकानें हैं जो दिनभर खुली रहती है. यहां सामान रखा रहता है. ग्राहक खुद दुकान में घुसकर सामान चुनता है. कीमत चेक करने के लिए स्कैनर या प्राइस लिस्ट का इस्तेमाल करता है. इसके बाद पैसे कैशबॉक्स में डालता है या ऑनलाइन पेमेंट करता है. अगर जरूरत हो तो चेंज खुद ले लेता है. दुकानदार आसपास के काम में व्यस्त रहता है. शाम को गिनती करके देखता है कि सब ठीक है. चोरी के मामले बेहद कम या ना के बराबर होते हैं.

नागालैंड की संस्कृति और ईमानदारी
नागालैंड पूर्वोत्तर भारत का एक सुंदर राज्य है. यहां की जनजातियां अपनी परंपराओं, ईमानदारी और सामुदायिक जीवन के लिए जानी जाती हैं. लोग एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं. सामुदायिक मूल्य इतने मजबूत हैं कि कोई गलत काम करने से पहले दस बार सोचता है. यहां अपराध दर भी कम है. पर्यटक बताते हैं कि ना सिर्फ दुकानें बल्कि अन्य सेवाओं में भी यह भरोसा दिखता है. टैक्सी वाले सही किराया लेते हैं, होमस्टे मालिक अतिरिक्त चार्ज नहीं करते. यह व्यवस्था आधुनिक दुनिया में विरले ही देखने को मिलती है.

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