भारतीय अर्थव्यवस्था ने बाहरी अनिश्चितताओं का बखूबी सामना किया है और हाल के महीनों में विदेशी निवेश में सुधार से भरोसा लौटने का संकेत मिलता है. भारतीय रिजर्व बैंक के बुधवार को जारी बुलेटिन में यह कहा गया. केंद्रीय बैंक के जुलाई बुलेटिन में प्रकाशित एक लेख में कहा गया है कि दुनिया में अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में काफी अनिश्चितता बनी हुई है.

RBI की रिपोर्ट के मुताबिक इन अनिश्चितताओं के बावजूद, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है और जून तक आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनाए रखने में कामयाब रहा है. औद्योगिक और सेवा क्षेत्र के संकेतक मजबूत बने रहे.
महंगाई पर हो सकता है काबू
अर्थव्यवस्था की स्थिति पर लिखे लेख में यह भी कहा गया है कि कृषि क्षेत्र में दक्षिणपश्चिम मानसून का वितरण समान नहीं है. हालांकि, खाद्यान्न भंडार संतोषजनक होने से खाद्य महंगाई पर इसका प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित रह सकता है. इसमें कहा गया कि 202627 की पहली तिमाही में निर्यात और आयात में हुई अच्छी वृद्धि से पता चलता है कि विदेश व्यापार की रफ्तार बनी रही. भारतब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के लागू होने तथा अन्य द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में हो रही प्रगति से देश की आर्थिक गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
20 जुलाई तक 1 अरब डॉलर का निवेश
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के बाह्य क्षेत्र से जुड़े जोखिम संकेतक मजबूत बने हुए हैं. हाल के महीनों में विदेशी निवेश में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ने के संकेत मिलते हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने बीते महीने शुद्ध रूप से निवेश किया. इसका कारण बॉन्ड बाजार के लिए नीतिगत समर्थन और वैश्विक स्तर पर तनाव में कमी है. एफपीआई ने इक्विटी और बॉन्ड बाजार में जुलाई में कुल 3.1 अरब डॉलर का निवेश किया. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अप्रैलमई 2026 के दौरान सकल और शुद्ध, दोनों आधार पर बढ़ा. इस दौरान जापान, सिंगापुर और मॉरीशस से कुल इक्विटी निवेश का लगभग 74 प्रतिशत प्राप्त हुआ. वित्तीय सेवाएं, विनिर्माण, खुदरा एवं थोक व्यापार तथा कंप्यूटर सेवाएं सबसे अधिक निवेश आकर्षित करने वाले क्षेत्र रहे. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इनमें कुल निवेश का करीब 80 प्रतिशत आया. भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश का लगभग 74 प्रतिशत हिस्सा अमेरिका, केमैन आइलैंड और नीदरलैंड में गया.
इन सेक्टर्स की बढ़ी हिस्सेदारी
इसमें वित्तीय, बीमा एवं व्यावसायिक सेवाओं तथा विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 85 प्रतिशत से अधिक रही. कीमत स्थिति के बारे में इसमें कहा गया है कि जून, 2026 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई बढ़कर 18 महीने के उच्च स्तर 4.4 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मई में यह 3.9 प्रतिशत थी. जनवरी, 2025 के बाद यह पहली बार आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर पहुंची है. खाद्य एवं पेय पदार्थों तथा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण रही, जबकि कोर यानी मुख्य मुद्रास्फीति लगभग स्थिर रही. आरबीआई ने हालांकि स्पष्ट किया कि बुलेटिन में प्रकाशित लेख में व्यक्त विचार लेखकों के निजी हैं और इन्हें भारतीय रिजर्व बैंक का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं माना जाना चाहिए.