भारत में धड़ल्ले से बिक रही पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम, इस्तेमाल करने वालों की किडनी हो सकती है खराब

भारत में धड़ल्ले से बिक रही पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम, इस्तेमाल करने वालों की किडनी हो सकती है खराब
भारत में धड़ल्ले से बिक रही पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीम, इस्तेमाल करने वालों की किडनी हो सकती है खराब

चेहरे को गोरा करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ पाकिस्तानी फेयरनेस क्रीमों को लेकर भारत में चिंता बढ़ गई है. केंद्र सरकार ने पाकिस्तान में बनी कुछ स्किन व्हाइटनिंग क्रीमों के संबंध में अलर्ट जारी किया है. इन प्रोडक्ट्स में निर्धारित सीमा से अधिक हेवी मेटल्स पाए जाने की बात सामने आई है. ऐसे में इनके इस्तेमाल से स्किन के साथ-साथ किडनी और शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है.

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने ‘गोरी’ ब्यूटी क्रीम समेत संबंधित प्रोडक्ट को लेकर चेतावनी जारी की है. अधिकारियों को भेजे गए निर्देशों में इन उत्पादों की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने तथा आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई है.

नागपुर में किडनी संबंधी मामले ने बढ़ाई चिंता

स्किन व्हाइटनिंग क्रीम के इस्तेमाल और किडनी संबंधी समस्याओं को लेकर नागपुर से सामने आए एक मामले ने भी चिंता बढ़ाई है. एक्सपर्ट का कहना है कि कुछ फेयरनेस क्रीम में मरकरी जैसे जहरीले पदार्थ मौजूद हो सकते हैं. इनके लंबे समय तक इस्तेमाल से शरीर में हानिकारक तत्व जमा हो सकते हैं, जिससे किडनी और नर्वस सिस्टम प्रभावित होने का खतरा रहता है.

क्या कहती हैं डर्मेटोलॉजिस्ट?

एशियन हॉस्पिटल की कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजी एवं हेयर ट्रांसप्लांट डॉ. राधिका रहेजा का कहा, “स्किन को गोरा करने के लिए इस्तेमाल होने वाली क्रीम में यदि मरकरी जैसे जहरीले पदार्थ मौजूद हों, तो उनका लगातार इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. मरकरी त्वचा के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकता है और लंबे समय तक संपर्क रहने पर किडनी तथा तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए बिना प्रमाणित सामग्री और जरूरी नियामक मंजूरी वाले उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.”

पाकिस्तान में बनी क्रीम भारतीय बाजार तक कैसे पहुंचीं?

इन प्रोडक्ट्स को लेकर एक बड़ा सवाल ये भी है कि पाकिस्तान में बनी क्रीम भारतीय बाजार तक कैसे पहुंचीं. भारत में आयातित कॉस्मेटिक्स के लिए निर्धारित रजिस्ट्रेशन और नियामक प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है. अगर कोई उत्पाद बिना जरूरी मंजूरी के बाजार में पाया जाता है, तो उसके आयात, वितरण और बिक्री की जांच की जा सकती है.

सीमा पार से किसी उत्पाद का बाजार तक पहुंचना और उसका कानूनी रूप से आयात किया जाना अलग-अलग बातें हैं. इसलिए यह पता लगाना जरूरी है कि संबंधित क्रीम भारत तक किस रास्ते से पहुंचीं और किन माध्यमों से उनका वितरण किया गया.

क्या इन क्रीमों के पास इंपोर्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट था?

सीडीएससीओ के अलर्ट में संबंधित उत्पादों के भारत में बिक्री के लिए जरूरी इंपोर्ट रजिस्ट्रेशन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है. भारत में आयातित कॉस्मेटिक्स के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के तहत आवश्यक रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य होता है.

डॉ. राधिका रहेजा कहती हैं,  ‘भारत में किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद को आयात कर बेचने के लिए निर्धारित नियामक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है. उत्पाद की पैकेजिंग, सामग्री, निर्माता और रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी की जांच करना महत्वपूर्ण है. बिना जरूरी मंजूरी के बाजार में बिकने वाले उत्पाद उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हैं.’

सीडीएससीओ ने ‘गोरी’ ब्यूटी क्रीम पर जताई चिंता

सीडीएससीओ ने ‘गोरी’ ब्यूटी क्रीम सहित संबंधित उत्पादों को लेकर अलर्ट जारी किया है. जांच में इनमें निर्धारित सीमा से अधिक हेवी मेटल्स पाए जाने की बात सामने आई है. ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल से बचने की सलाह दी गई है.

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी क्रीम में हेवी मेटल्स की मौजूदगी का खतरा उसकी मात्रा, इस्तेमाल की अवधि और शरीर में उसके अवशोषण पर निर्भर करता है. मरकरी, लेड और आर्सेनिक जैसे पदार्थों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। हालांकि, किसी उत्पाद में हेवी मेटल्स पाए जाने का यह अर्थ नहीं है कि उसका इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को बीमारी हो जाएगी.

क्या हर इंपोर्टेड क्रीम की जांच होती है?

भारत में कॉस्मेटिक्स के आयात और निर्माण के लिए नियामक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन किसी उत्पाद का रजिस्ट्रेशन होना और बाजार में उपलब्ध उसके हर बैच की प्रयोगशाला में जांच होना अलग-अलग बातें हैं. नियामक अधिकारी बाजार से नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशालाओं में उनकी जांच करा सकते हैं.

यदि जांच में प्रतिबंधित पदार्थ या निर्धारित सीमा से अधिक हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा उत्पाद की बिक्री रोकने, बाजार से हटाने और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

फेयरनेस क्रीम इस्तेमाल करने वालों को क्या करना चाहिए?

यदि किसी व्यक्ति ने अलर्ट में शामिल किसी क्रीम का इस्तेमाल किया है, तो उसे फिलहाल उसका उपयोग बंद कर देना चाहिए. त्वचा पर जलन, लालिमा, खुजली, असामान्य रंगत, हाथ-पैरों में झुनझुनी या अन्य किसी प्रकार की परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

क्रीम खरीदने से पहले किन बातों पर दें ध्यान?

डॉ. राधिका रहेजा कहती हैं कि किसी भी स्किन व्हाइटनिंग क्रीम को खरीदने से पहले कुछ बातों पर ध्यान दें, जैसे-

  • क्रीम में मौजूद इंग्रीडिएंट जरूर चेक करें.
  • क्रीम बनाने वाले निर्माता और बैच नंबर देखें.
  • एक्सपायरी डेट और नियामक मंजूरी की जानकारी जरूर जांच लें.

ध्यान रखें कि सोशल मीडिया पर किए गए गोरा करने के दावों के आधार पर अनजान क्रीम का इस्तेमाल न करें. स्किन की रंगत या पिगमेंटेशन से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.

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