मानसून सत्र से पहले बोलीं मायावती संसद में शोर नहीं, जनहित के मुद्दों पर हो बहस; राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी किया जिक्र

मानसून सत्र से पहले बोलीं मायावती संसद में शोर नहीं, जनहित के मुद्दों पर हो बहस; राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी किया जिक्र
मानसून सत्र से पहले बोलीं मायावती संसद में शोर नहीं, जनहित के मुद्दों पर हो बहस; राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी किया जिक्र

नई दिल्ली/लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र को स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से चलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संसद में बारबार के हंगामे और स्थगन की बजाय जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर किए गए पोस्ट में मायावती ने कहा कि देश इस समय महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला सुरक्षा, पेपर लीक समेत कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। ऐसे में संसद का समय इन समस्याओं के समाधान खोजने में लगाया जाना चाहिए।

राम मंदिर चढ़ावा मामले का भी किया जिक्र

बसपा प्रमुख ने अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनचर्चा और आक्रोश है। उन्होंने कहा कि इसकी गूंज सड़कों से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है और संसद में भी इस विषय पर चर्चा होने की संभावना है।

महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाए

मायावती ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति, राजस्थान में गर्भवती महिलाओं की मौत, विभिन्न राज्यों में महिला असुरक्षा, सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार, पुलिस मुठभेड़ों और अतिक्रमण हटाने के दौरान बस्तियों के ध्वस्तीकरण जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।

अंतरराष्ट्रीय हालात पर भी जताई चिंता

उन्होंने कहा कि अमेरिकाइजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष तथा रुपये के अवमूल्यन जैसे अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक घटनाक्रमों का भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देशहित में मिलकर समाधान तलाशना चाहिए।

मायावती ने कहा कि मौजूदा सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए संसद का मानसून सत्र बिना किसी उत्तेजना, रोष या विद्वेष के स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी संस्थाओं से भी आम जनता की समस्याओं को कम करने और जनहित में प्रभावी भूमिका निभाने का आग्रह किया।

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