मुंह का कैंसर होने पर शुरुआत में दिख सकते हैं ये लक्षण, कैंसर विशेषज्ञ ने कहा नजरअंदाज न करें

मुंह का कैंसर होने पर शुरुआत में दिख सकते हैं ये लक्षण, कैंसर विशेषज्ञ ने कहा नजरअंदाज न करें
मुंह का कैंसर होने पर शुरुआत में दिख सकते हैं ये लक्षण, कैंसर विशेषज्ञ ने कहा नजरअंदाज न करें

मुंह का कैंसर (Oral Cancer) एक गंभीर बीमारी है, लेकिन अगर समय रहते इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो इसका सफल इलाज संभव है। अक्सर लोग मुंह में छालों या लाल-सफेद धब्बों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर खतरनाक रूप ले सकते हैं। मुंह के कैंसर के मामले में भी शुरुआती स्टेज पर शरीर कुछ छोटे-छोटे संकेत देता है। अगर आपके मुंह में लगातार दर्द, छाले या सफेद-लाल चकत्ते दिख रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।

आकाश हेल्थकेयर में डायरेक्टर, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी में डॉ.अरुण कुमार गिरी ने बताया मुंह के कैंसर के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। डॉक्टर गिरी ने जनसत्ता को बताया अगर ओरल हाइजीन और डेंटल हाइजीन अच्छा नहीं है तो ओरल बैक्टीरिया कैंसर का कारण बन सकते हैं। अगर ओरल कैंसर का स्टेज-1 में पता चल जाए तो आसानी से इलाज किया जा सकता है। डॉक्टर गिरी ने बताया अगर बॉडी में लक्षण दिखने के बाद मरीज 6 महीनों तक बीमारी के लक्षणों को इग्नोर करें तो ये कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाता है और इसका इलाज करना मुश्किल हो जाता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ओरल कैंसर क्या है और बॉडी में इसके कौन कौन से लक्षण दिखते हैं और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है। Also Readतांबे और पीतल में स्टोर करें ‘स्वर्ण जल’: आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से जानिए पानी में सोने का सिक्का उबालकर पीने के फायदे और सही तरीका

मुंह का कैंसर क्या है?

मुंह का कैंसर (Oral Cancer) एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसमें मुंह के अंदर मौजूद कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं। आमतौर पर इस कैंसर के लिए खराब आदतों जैसे तंबाकू, गुटखा और धूम्रपान को जिम्मेदार ठहराया जाता है। एचपीवी संक्रमण, मुंह की साफ-सफाई में कमी, दांतों और मसूड़ों से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याएं, मुंह के अंदर लगातार होने वाली चोट या जलन, पोषण की कमी और कुछ आनुवंशिक कारक भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ाते हैं। डॉक्टर गिरी ने बताया मुंह में लंबे समय से बने किसी घाव, गांठ, सफेद या लाल चकत्ते या फिर लगातार दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। Also ReadClove Water Benefits: पाचन के लिए लौंग के पानी का सेवन कैसे करता है असर, डॉक्टर से जानिए फायदे और तरीका

मुंह के किस हिस्से में होता है ओरल कैंसर?

मुंह का कैंसर एक ऐसा कैंसर है जो मुंह में कई जगहों जैसे लिप्स, जुबान के पास, अपर लिप्स, लोअर लिप्स, जीभ का पिछला हिस्सा (dorsum of tongue) और साइट ऑफ टंग, तलवा में ये कैंसर हो सकता है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। मुंह के किसी भी हिस्से में होने वाले इस कैंसर को ही ओरल कैंसर कहा जाता है।

ओरल कैंसर के लक्षण कौन-कौन से हैं?

  • मुंह में घाव या अल्सर जो 2-3 हफ्तों में ठीक न हो उसे नजरअंदाज नहीं करें
  • गाल के अंदर या मसूड़ों पर मोटा या कठोर धब्बा।
  • मुंह के अंदर या जीभ पर सफेद या लाल धब्बे।
  • चबाने, बोलने या निगलने में परेशानी।
  • दांतों का हिलना या बिना कारण दांत गिर जाना।
  • गले में दर्द
  • कान में दर्द
  • जबड़े या गाल में सूजन
  • मुंह से बार-बार खून आना
  • आवाज में बदलाव होना
  • सांसों में दुर्गंध होना
  • अचानक वजन घटना
  • भूख कम होना
  • गले में गांठ जो लंबे समय तक बनी रहे ये माउथ कैंसर के लक्षण हो सकते हैं।

ओरल कैंसर की पुष्टि के लिए कौन सा टेस्ट है जरूरी

डॉक्टर अरुण कुमार गिरी ने बताया जीभ और मुंह में दिखने वाले इन सभी लक्षणों को देखकर आप तुरंत सतर्क हो जाएं और ऑनकोलॉजिस्ट को दिखाएं। ओरल कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर बायोप्सी कराते हैं जिससे शुरुआत में भी ओरल कैंसर का पता लग जाता है और आसानी से इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

ओरल कैंसर से कैसे करें बचाव

  • मुंह के कैंसर के जोखिम को कम करना चाहते हैं तो तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों जैसे गुटखा, खैनी, तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट का सेवन नहीं करें। शराब का सेवन भी सीमित करें।
  • अपनी डाइट को इंद्रधनुषी डाइट बनाएं। डाइट में अलग-अलग तरह के फल, हरी सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। सं
  • ओरल हाइजीन को नजरअंदाज न करें। दांतों और मुंह की नियमित सफाई करें और दांतों की किसी भी समस्या का समय पर इलाज कराएं।
  • मुंह में कोई घाव लंबे समय तक ठीक न हो, सफेद या लाल चकत्ता दिखाई दे, गांठ बने, लगातार दर्द रहे या मुंह खोलने और निगलने में परेशानी हो तो इसे नजरअंदाज न करें।
  • मुंह के कैंसर का इलाज संभव है और बीमारी का जल्दी पता चलने पर उपचार के विकल्प अधिक प्रभावी हो सकते हैं।

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