‘मैं सुपर ह्यूमन​​ नहीं हूं, 24 घंटे ड्यूटी नहीं कर सकता… कॉन्स्टेबल ने सरकारी WhatsApp ग्रुप में डाला इस्तीफा लैटर, वायरल होने से मचा हड़कंप​​

‘मैं सुपर ह्यूमन​​ नहीं हूं, 24 घंटे ड्यूटी नहीं कर सकता… कॉन्स्टेबल ने सरकारी WhatsApp ग्रुप में डाला इस्तीफा लैटर, वायरल होने से मचा हड़कंप​​
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Varanasi Policeman Resignation Letter: 9 सितंबर 2026, कॉरपोरेट कंपनियों से लेकर सरकारी विभागों तक वर्क कल्चर और लगातार बढ़ते काम के दबाव को लेकर आयेदिन सवाल खड़े किये जाते हैं. इसी बीच उत्तरप्रदेश के वाराणसी में एक सिपाही के इस्तीफा लैटर से हड़कंप मच गया. सिपाही ने पुलिस के वाट्सऐप ग्रुप में लिखा मुझमें विशिष्ट मानव जैसी शक्तियां नहीं हैं कि मै लगातार 24 घंटे काम कर सकूं.

कॉन्स्टेबल ने वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर किया इस्तीफा लैटर

मामला वाराणसी के रामनगर थाने का है. कॉन्स्टेबल का नाम देवगन कुमार चौहान है जो रामनगर थाने में तैनात है. पुलिस की ड्यूटी और वर्कलोड से परेशान होकर देवगन कुमार चौहान ने इस्तीफा लैटर लिख दिया. जिसे उसने थाने के वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर किया.

लिखा- 24X7 प्रत्येक दिन कार्य कर सकता

कांस्टेबल देवगन कुमार चौहान ने लेटर में लिखा, मैं प्रार्थी देवगन कुमार चौहान थाना-रामनगर कमिव कराणानी में बतौर आरक्षी के पद पर कार्यरत हूँ. महोदय आप से निवेदन है कि मै अभी इतना सक्षम नहीं हूं की 24X7 प्रत्येक दिन कार्य कर सकूं. चूंकि मुझमे किसी विशिष्ट मानव जैसी शक्तियां नहीं है. अतः मुझे कार्यमुक्त कर कृतार्थ करें.

ग्रुप के किसी सदस्य ने लेटर को वायरल कर दिया जो मामला सोशल मीडिया तक पहुंच गया. लेटर सामने आते ही पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई. जिसके बाद अधिकारियों ने कांस्टेबल से बात कर समझाया. जिसके उसने माफी मांगते हुए इस्तीफा पत्र डिलीट कर दिया.

ट्रॉमा सेंटर में मरीज की ड्यूटी से था परेशान

इस बारे में रामनगर थाना अध्यक्ष संजय मिश्रा ने बताया, वह ट्रॉमा सेंटर में इलाज करा रहे एक मरीज के साथ लगातार ड्यूटी कर रहा है. साथ ही घरेलू वजहों से भी परेशान चल रहा था. इन सबसे सिपाही मानस‍िक रूप से परेशान था. जिस वजह से इस्तीफा लिखा और ग्रुप में डाल दिया था. उसने इस्तीफा वापस ले लिया है. फिलहाल सिपाही का काउंसिलिंग कराकर उसका इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया है.

सोशल मीडिया पर लैटर वायरल

दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर लैटर वायरल हो रहा है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। लोग यूपी पुलिस फोर्स में काम के दबाव पर सवाल खड़े कर रहे हैं. एक व्यक्ति ने लिखा, “अक्सर सरकारी हो या प्राइवेट, लगभग हर विभाग में उच्च पद पर बैठे अधिकारी या कर्मचारी अपने अधीनस्थ (जूनियर) कर्मचारियों का मानसिक या शारीरिक शोषण करते हैं. आखिर इस व्यापक समस्या के पीछे मूल कारण क्या हैं .

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