Surendra Koli Suicide: देश के चर्चित निठारी कांड से करीब दो दशक तक जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई. सुरेंद्र कोली का शव एक चाय की दुकान के अंदर फांसी के फंदे पर लटका मिला. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. उसकी मौत की खबर सामने आने के बाद एक बार फिर निठारी कांड की पुरानी कहानी चर्चा में आ गई. सुरेंद्र कोली हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर ‘सदा राम’ के नाम से रह रहा था. सदा राम के नाम से ही उसने वोटर आईडी कार्ड भी बनवा रखा था. यहां उसने चार दिन पहले ही चाय की दुकान शुरू की थी. दुकान खोलने से पहले वह एक सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी कर चुका था. उसके दोस्त धर्मेंद्र कौशिक ने बताया कि मौत से कुछ समय पहले सुरेंद्र परेशान चल रहा था. एक दिन पहले ही फोन पर उसकी परिवार के लोगों से लड़ाई भी हुई थी.

दोस्त ने बताया, 15 दिन पहले हुई थी मुलाकात
सुरेंद्र के दोस्त धर्मेंद्र कौशिक ने बताया कि करीब 15 दिन पहले सुरेंद्र उसके संपर्क में आया था. उसने कहा था कि सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी उससे नहीं हो पा रही है और वह काफी परेशान है. सुरेंद्र ने उससे कोई दुकान दिलाने की बात कही थी. धर्मेंद्र के मुताबिक, उसने अपनी गारंटी पर सुरेंद्र को चाय की दुकान दिलवाई थी और दुकान के लिए सामान भी उपलब्ध कराया था. उसने सुरेंद्र से कहा था कि अब अपना काम करो और आराम से रहो.
धर्मेंद्र का कहना है कि पिछले दो दिनों से सुरेंद्र काफी परेशान था. खासतौर पर बच्चे के जन्मदिन को लेकर वह तनाव में था. उसने बताया कि मौत से एक दिन पहले सुरेंद्र की परिवार के लोगों से फोन पर लड़ाई भी हुई थी. हालांकि, इस विवाद की वजह क्या थी, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
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सुबह दुकान नहीं खुली तो हुआ शक
धर्मेंद्र ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे वह दुकान पर पहुंचा था. वहां कुछ ग्राहक मौजूद थे. उन्होंने बताया कि आज चाचा ने दुकान नहीं खोली है. इसके बाद धर्मेंद्र ने दुकान के शटर पर दोचार बार हाथ मारा, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र को शुगर की बीमारी भी थी. उसे लगा कि कहीं उसकी तबीयत खराब न हो गई हो या शुगर कम होने की वजह से वह बेहोश न हो गया हो. इसके बाद उसने शटर पर जोरजोर से लात मारी. शटर खुल गया. अंदर झांककर देखने पर सुरेंद्र जमीन पर पड़ा दिखाई दिया. धर्मेंद्र ने अंदर जाकर देखा तो सुरेंद्र फांसी के फंदे पर लटका हुआ था. इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई.
‘सदा राम’ के नाम से रह रहा था
दोस्त ने बताया कि सुरेंद्र यहां ‘सदा राम’ नाम से रह रहा था. आसपास के लोगों को भी उसकी असली पहचान की जानकारी नहीं थी. बाद में पता चला कि वह वही सुरेंद्र कोली है, जिसका नाम निठारी कांड में सामने आया था. धर्मेंद्र ने बताया कि सुरेंद्र ने एक सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी भी की थी. नौकरी के दौरान उससे पहचान पत्र मांगा गया था, लेकिन उसने कहा था कि फिलहाल उसके पास आईडी नहीं है और बाद में उपलब्ध करा देगा. धर्मेंद्र ने अपनी आईडी देकर उसकी गारंटी ली थी. दोस्त के मुताबिक, सुरेंद्र का व्यवहार काफी अच्छा था. वह ज्यादा लोगों से मतलब नहीं रखता था. सामान्य तरीके से अपनी जिंदगी जी रहा था. उसने रोशनाबाद में रहने के लिए किराए पर कमरा भी लिया हुआ था.
4 दिन पहले खोली थी चाय की दुकान
हरिद्वार में सुरेंद्र ने करीब चार दिन पहले ही चाय की दुकान शुरू की थी. इससे पहले वह दीप गंगा सोसाइटी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर चुका था. दोस्त के अनुसार, वह नौकरी छोड़कर अपना छोटा कारोबार शुरू करना चाहता था. हालांकि, दुकान शुरू करने के कुछ ही दिन बाद उसकी मौत हो गई. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसकी मौत के पीछे क्या वजह थी. मौके से पुलिस को क्याक्या मिला और कोई सुसाइड नोट मिला या नहीं, इसकी जानकारी जांच के बाद सामने आएगी. पुलिस को दुकान के अंदर से सुरेंद्र कोली के दो पहचान पत्र मिले हैं. आधार कार्ड तो उसका असली नाम से था, लेकिन वोटर आईडी कार्ड उसने ‘सदा राम’ के नाम से बनवा रखा था.
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अल्मोड़ा के मंगरूखाल गांव का था रहने वाला
सुरेंद्र कोली मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे क्षेत्र के मंगरूखाल गांव का रहने वाला था. वह चार भाइयों में दूसरे नंबर पर था. परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य थी. उसने सातवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी. रोजगार की तलाश में वह दिल्ली गया था. बाद में वह नोएडा पहुंचा और कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की डी5 कोठी में घरेलू सहायक के तौर पर काम करने लगा. दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी इलाके में बच्चों और महिलाओं के नरकंकाल मिलने के बाद यह मामला देशभर में चर्चा में आया. इसके बाद सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए.
कई मामलों में मिली थी फांसी की सजा
निठारी कांड से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली को अलगअलग अदालतों ने कई बार मौत की सजा सुनाई थी. हालांकि, वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया में इन मामलों की स्थिति बदलती गई. अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निठारी से जुड़े 12 मामलों में कोली को दोषमुक्त कर दिया था. इसके बाद जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में उसकी बरी होने की स्थिति को बरकरार रखा. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने रिम्पा हलदार मामले में भी उसकी दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया. इसके साथ ही निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित अंतिम दोषसिद्धि भी खत्म हो गई और वह बरी हो गया. जेल से बाहर आने के बाद वह हरिद्वार में रहने लगा था.
निठारी कांड के बाद बिखर गया परिवार
सुरेंद्र कोली की पत्नी का नाम शांति देवी है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उसके दो बच्चे हैं. निठारी कांड सामने आने के समय शांति देवी अल्मोड़ा के मंगरूखाल गांव में रहती थीं. उस समय उनकी एक छोटी बेटी थी और जनवरी 2007 में उन्होंने बेटे को जन्म दिया था. शांति देवी ने भी उस समय अपने पति को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उसे मामले में फंसाया गया है. निठारी कांड के बाद 200809 के आसपास वह दोनों बच्चों के साथ गांव छोड़कर चली गई थीं.