
अमृत विचार : शहर, मकान, सड़क…। दुनिया भर के तमाम संसाधन, सब कुछ तो इंसानों के लिए हैं। पशुओं के लिए क्या है? जंगल थे, उजाड़ दिए। इंसान जंगलों में घुस गया और वन्यजीव आबादी में…। गांव तो ठीक हैं, शहर बंदरों से तंग हैं। जंगलों की तबाही के बाद बंदरों ने शहरों को ही अपना ठिकाना बना लिया है। अब शहर वाले बंदरों से परेशान हैं और उन्हें शहर से बेदखल करने की आवाजें उठा रहे हैं। ऐसी ही मांगों के बीच यूपी के मुरादाबाद में जिलाप्रशासन ने बंदरों की उनकी अपनी दुनिया बसाने की इरादा किया है। राम गंगा के तट पर बाकयदा बंदरों का एक शहर बसाया जाएगा।
मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया की अध्यक्षता में गुरुवार को कलक्ट्रेट सभागार में बंदरों के कारण जन सामान्य को होने वाली परेशानी को लेकर बैठक हुई। समस्या का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान तलाशने पर मंथन चला। नगर निगम, वन विभाग, उद्यान विभाग सहित तमाम विभागों के अफसर मौजूद हुए। प्रकृति के संरक्षण से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों और विशेषज्ञों के साथ एक कार्य योजना पर चर्चा की गई है।
रामगंगा के तट पर होगा अपना संसार
तय हुआ कि रामगंगा नदी के तटीय क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के फलदार एवं छायादार पौधे लगाए जाएंगे। बंदरों के लिए प्राकृतिक भोजन एवं आवास की व्यवस्था विकसित होने से प्राकृतिक परिवेश में सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करने में आसानी होगी। मतलब, बंदरों को उनकी अपनी दुनिया में लौटाने के लिए प्राकृतिक आशियाने बनाने होंगे। जल, जंगल और जमीन , यही वन्यजीवों का पूंजी है। बस, मानव हस्तक्षेप न करें। बहुत संभव है कि बंदर भी इंसानी जीवन में दखल नहीं देंगे।
बहरहाल, मुरादाबाद जिला प्रशासन ने ये शानदार पहल की है। वन्यजीवों को आबादी से बाहर निकालने के लिए उनकी अपनी दुनिया बसानी ही होगी। पशु प्रेमी और पर्यावरिण कार्यकर्ता भी इसकी मांग उठाते रहे हैं।
मुरादाबाद के जिलाधिकारी ने बंदरों की समस्या का समाधान करने के लिए वन विभाग और नगर निगम संयुक्त रूप से समन्वित कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
बंदरों के लिए बनेगी टास्क फोर्स
डीएम ने कहा कि बंदरों के संरक्षण एवं आमजन की सुरक्षा के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठित बनाई जाएगी। इसमें विभागों के अधिकारियों के साथ ही प्रकृति संरक्षण एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं।
पशु अधिकार एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय गौरी मउलेखी ने वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल होकर कई राज्यों में बंदरों की समस्या के समाधान और प्राकृतिक आवास में स्थानांतरित करने के तरीके साझा किए। बताया कि दिल्ली नगर निगम ने असोला वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में बंदरों के संरक्षण का सफल मॉडल विकसित किया गया है।
जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं वन विभाग विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप रामगंगा तटीय क्षेत्र में ऐसा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र विकसित करने की संभावना तलाशने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि बंदरों की समस्या का समाधान वैज्ञानिक पद्धति एवं उनके जैविक व्यवहार को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी मृणाली अविनाश जोशी, अपर नगर आयुक्त अतुल कुमार, अपर जिलाधिकारी नगर अंकुर श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुलदीप सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन संगीता गौतम, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट शक्ति दुबे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
तेंदुआ पकड़ने के क्या हैं संसाधन, डीएम ने ली जानकारी
जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी से वन विभाग के पास उपलब्ध संसाधनों, विशेष रूप से तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए उपलब्ध उपकरणों एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निर्देश दिया कि जिन क्षेत्रों में तेंदुआ की गतिविधियां अधिक हैं, वहां संबंधित नगर पालिका एवं नगर पंचायतें शीघ्रातिशीघ्र केज ट्रैप की खरीद सुनिश्चित कर उन्हें वन विभाग को उपलब्ध कराएं, जिससे वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।