
आगरा: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को आगरा में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों और उच्च शिक्षण संस्थानों से राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि देश के भीतर कुछ ताकतें षड्यंत्र रचकर समाज में भ्रम और अव्यवस्था फैलाने की कोशिश करें, तो शिक्षक समाज को उनके खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा विभाग की ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना’ के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह योजना प्रदेश के 7.50 लाख से अधिक शिक्षकों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान हमेशा सर्वोच्च रहा है। चाहे गुरुकुल परंपरा हो या आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक समाज को दिशा देने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं।
उन्होंने बिना किसी संगठन या व्यक्ति का नाम लिए कहा कि कुछ शक्तियां भारत की प्रगति से असहज हैं और आधुनिक तकनीक तथा बाहरी संसाधनों का उपयोग कर समाज में भ्रम और विद्वेष फैलाने का प्रयास करती हैं। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समाज दुष्प्रचार का शिकार होता है तो उसमें नकारात्मकता बढ़ती है और अंतत समाज अपने ही हितों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों में सही सोच, जागरूकता और राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आग्रह किया कि वे राष्ट्रनिर्माण और सकारात्मक विचारों के केंद्र बनें। विश्वविद्यालयों के प्रकाशन केंद्रों में समाज की उपलब्धियों, सफलताओं और प्रेरणादायक उदाहरणों को स्थान दिया जाना चाहिए।
योगी ने कहा कि शिक्षक केवल पढ़ाने तक सीमित न रहें, बल्कि छात्रों के लिए प्रेरणा बनें। ऐसा करने पर वर्तमान और आने वाली पीढ़ियां उन्हें सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद रखेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत जबजब विकास और समृद्धि की ओर बढ़ा, तबतब उसे प्रत्यक्ष और परोक्ष चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यदि भविष्य में भी देश के खिलाफ किसी प्रकार का षड्यंत्र रचा जाता है तो शिक्षक समाज को युवाओं को जागरूक कर राष्ट्रहित में आगे आना होगा।
उन्होंने शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि यदि कक्षाएं नीरस हो जाएं तो विद्यार्थियों की रुचि कम हो जाती है। इसलिए हर शिक्षक को विद्यार्थियों के दृष्टिकोण से भी स्वयं का मूल्यांकन करना चाहिए।
सोशल मीडिया का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बड़ी संख्या में युवा अपने स्मार्टफोन के जरिए जानकारी प्राप्त करते हैं और कई बार बिना सत्यापन के सोशल मीडिया की बातों को सही मान लेते हैं। इसलिए शिक्षकों को विद्यार्थियों में तथ्य और अफवाह के बीच अंतर समझाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह नीति शिक्षकों और छात्रों के लिए नए अवसर लेकर आई है। उन्होंने प्रत्येक शिक्षक और विद्यार्थी को कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में दक्ष बनने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई प्रतिभा होती है, लेकिन उसे पहचानने और विकसित करने का कार्य शिक्षक ही कर सकता है। भारतीय परंपरा में गुरु को सर्वोच्च स्थान इसी कारण दिया गया है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।