
लखनऊ में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव का नाम अचानक सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया है. वजह है उनका वह सवाल, जो मुख्यमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलते समय उन्होंने सीधे पूछा था. इसके बाद दिव्या ने कथित तौर पर ऑनलाइन ट्रोलिंग, अभद्रता और धमकियों का सामना करने का दावा किया है. मामला अब सिर्फ एक पत्रकार के सवाल तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि प्रेस की आजादी और सत्ता से सवाल पूछने के अधिकार को लेकर बहस में बदल गया है.
वायरल वीडियो में दिव्या श्रीवास्तव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करती दिखाई देती हैं. उनके सवाल का सार था कि अगर पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं देना है, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों की गई. पत्रकार दिव्या के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने सवाल का जवाब नहीं दिया और वहां से चले गए. इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते समय कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उनसे पूछा कि वह किस चैनल से पत्रकार हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री से इस तरह सवाल क्यों किया? जिसके बाद सोशल मीडिया पर चल रहा है कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है.
सवाल पूछने के बाद क्या हुआ?
दिव्या ने The Pioneer से बातचीत में दावा किया कि घटना के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक अलग नैरेटिव चलाया गया. उनके बारे में यह प्रचारित किया गया कि उन्हें किसी राजनीतिक दल के इशारे पर मुख्यमंत्री से सवाल पूछने भेजा गया था. दिव्या ने इन आरोपों को खारिज किया और खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताया. उनका कहना है कि किसी पत्रकार के सवाल को उसके राजनीतिक समर्थन से जोड़ देना असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश है. उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर उन्हें धमकियां और गालियां मिलने लगीं और इस पूरे विवाद के बाद वह घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रही हैं.
क्या दिव्या श्रीवास्तव की नौकरी चली गई?
सोशल मीडिया पर यह दावा भी तेजी से वायरल हुआ कि मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के बाद दिव्या श्रीवास्तव को उनके मीडिया संस्थान से निकाल दिया गया. हालांकि दिव्या ने खुद इस दावे का खंडन किया है. The Pioneer को दिए बयान में उन्होंने कहा कि वह अब भी अपने न्यूज नेटवर्क के साथ काम कर रही हैं. यानी सोशल मीडिया पर चल रहे ‘नौकरी चली गई’ वाले दावे को उनकी ओर से स्वीकार नहीं किया गया है.
बुलडोजर की धमकी का दावा कितना सच?
इस पूरे विवाद में सबसे गंभीर दावा घर पर बुलडोजर चलाने की धमकी से जुड़ा है. सोशल मीडिया पोस्ट और कुछ वायरल वीडियो में दिव्या के हवाले से ऐसे आरोप किए जा रहे हैं. लेकिन यहां एक जरूरी सावधानी है. बुलडोजर की धमकी और कथित धमकियों के संबंध में स्वतंत्र पुलिस पुष्टि या आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी फिलहाल स्पष्ट रूप से सामने नहीं है. इसलिए इसे तथ्य के तौर पर नहीं बल्कि दिव्या के आरोप के रूप में ही लिखा गया है. दिव्या का कहना है कि उन्हें ऐसी बातें कही गईं जिनसे वह और उनका परिवार डर गया.
दिव्या श्रीवास्तव कौन?
दिव्या श्रीवास्तव एक पत्रकार हैं और मौजूदा विवाद के बाद उनकी पत्रकारिता की भूमिका पर चर्चा शुरू हुई है. उन्होंने बताया है कि उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में मास्टर्स किया है और वह PhD की तैयारी कर रही हैं. उनके अनुसार, पत्रकारिता उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि सत्ता से सवाल पूछने और आम लोगों की आवाज उठाने का माध्यम है.
हालांकि, उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर पृष्ठभूमि से जुड़ी विस्तृत, स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में फिलहाल बहुत कम उपलब्ध है. इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आ रही अलग-अलग जानकारियों को उनकी प्रोफाइल का हिस्सा मानना उचित नहीं होगा.
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे भावुक हिस्सा दिव्या का वह सवाल है, जिसमें वह अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई और पेशे को लेकर ही सवाल उठाती नजर आती हैं. उन्होंने कहा कि जिस पत्रकारिता को उन्होंने पढ़ा और समझा, उसमें सत्ता से सवाल पूछना पत्रकार का अधिकार माना जाता है. लेकिन अगर किसी सवाल के बाद पत्रकार को राजनीतिक खांचे में डाल दिया जाए, तो इससे पत्रकारिता के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़ा होता है.
उनका सवाल सिर्फ अपने साथ हुई कथित बदसलूकी तक सीमित नहीं है. वह यह भी पूछती हैं कि पत्रकार अगर सरकार से सवाल पूछे तो उसे तुरंत किसी राजनीतिक दल का समर्थक या विरोधी क्यों मान लिया जाता है?
BJP समर्थक होने का दावा और राजनीतिक नैरेटिव
विवाद के बाद सोशल मीडिया पर यह दावा भी सामने आया कि दिव्या को समाजवादी पार्टी या कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री से सवाल पूछने के लिए भेजा गया था. यही इस पूरे विवाद का एक बड़ा पहलू है. एक तरफ पत्रकार का कहना है कि उसने सामान्य पत्रकारिता के तहत सवाल पूछा, दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर उसी सवाल को राजनीतिक साजिश से जोड़ने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में असली सवाल यही है. क्या किसी पत्रकार के सवाल की आलोचना उसके सवाल के आधार पर होनी चाहिए या उसकी कथित राजनीतिक पहचान के आधार पर?
अखिलेश यादव ने भी उठाया मुद्दा
मामला राजनीतिक गलियारों तक भी पहुंच गया. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा और कहा हमारे कमाल के मुख्यमंत्री हैं नाम बदलने वाले. मुँह मोड़ कर भाग गये, मैदान छोड़ के भाग गये. चुनाव में क्या हाल होगा जब जनता इनसे सवाल पूछेगी महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछना कोई अपराध नहीं है.
वहीं कांग्रेस नेता सी.पी. राय की ओर से भी दिव्या के मामले को लेकर दावा किया गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और LIU द्वारा पूछताछ की गई और उन्होंने कहा कि सोशल में चल रहा है कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है. उन्होंने आगे कहा कि उस लड़की के खिलाफ किसी तरह की कार्यवाही न करें और ये देश के चौथे स्तंभ पर हमला है. कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि मैं कांग्रेस की तरफ से इसकी निंदी करता हूं. इन राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बाद विवाद और ज्यादा राजनीतिक हो गया. हालांकि, राजनीतिक नेताओं के दावों को संबंधित पक्षों की आधिकारिक पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
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