राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..
राख के ढेर में मिला 2,000 साल पुराना अनोखा खजाना, घास से बनी चप्पलों ने वैज्ञानिकों को चौंकाया..

स्पेन में पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान एक ऐसी खोज मिली है, जिसने प्राचीन इतिहास की कई परतें खोल दी हैं। शोधकर्ताओं को 2,000 वर्ष से अधिक पुरानी घास से बनी चप्पलें एक प्राचीन खदान के पास राख और कचरे के ढेर में मिली हैं। आश्चर्य की बात यह है कि सदियों तक राख में दबे रहने के बावजूद ये चप्पलें काफी हद तक सुरक्षित मिलीं।

यह खोज स्पेन के उरियम (Urium) क्षेत्र में हुई, जो सेविल से करीब 55 मील दूर स्थित एक प्राचीन खनन स्थल है। पुरातत्वविदों को खुदाई के दौरान आठ चप्पलों के अवशेष मिले, जिन्हें एस्पार्टो (Esparto) घास से तैयार किया गया था। माना जाता है कि इनका इस्तेमाल रोमन साम्राज्य के आने से पहले आयरन एज के मजदूर किया करते थे।

इस खोज पर आधारित अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका Pyrenae में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के अनुसार, चप्पलें पहली शताब्दी ईसा पूर्व (BCE) की एक धातु कार्यशाला के पास स्थित राख के ढेर में मिलीं। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। उसी क्षेत्र में कई भट्टियां, कार्यस्थल और अन्य संरचनाएं भी मिली हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह स्थान उस समय औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

शोध में सामने आया कि ये चप्पलें कार्यशाला के अंदर नहीं, बल्कि पास के उस स्थान पर मिलीं जहां भट्टियों की राख और अन्य बेकार सामग्री फेंकी जाती थी। चप्पलों पर अधिक इस्तेमाल के स्पष्ट निशान मिले हैं, जिससे माना जा रहा है कि टूट-फूट जाने के बाद इन्हें कचरे के साथ फेंक दिया गया था।

रेडियोकार्बन डेटिंग से चप्पलों की अलग-अलग आयु का भी पता चला। एक चप्पल का समय 28 से 124 ईस्वी (CE) के बीच का पाया गया, जबकि दूसरी 360 से 205 ईसा पूर्व (BCE) और तीसरी 175 से 56 ईसा पूर्व (BCE) की बताई गई। इससे संकेत मिलता है कि इस खनन क्षेत्र में कई सदियों तक लगातार काम होता रहा।

पुरातत्वविदों का मानना है कि यह खोज आयरन एज के लोगों के दैनिक जीवन, उनके पहनावे, कार्य संस्कृति और उस समय इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगी। राख की परतों ने इन जैविक वस्तुओं को लंबे समय तक सुरक्षित रखा, जिससे शोधकर्ताओं को प्राचीन मानव जीवन का एक दुर्लभ प्रमाण मिला है।

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