रास्ते से अचानक गायब हुआ F-35 का सामान, हलक में अटकी अमेरिका की जान, क्या चीन ने चुरा लिया ‘हैवान’?

रास्ते से अचानक गायब हुआ F-35 का सामान, हलक में अटकी अमेरिका की जान, क्या चीन ने चुरा लिया ‘हैवान’?
रास्ते से अचानक गायब हुआ F-35 का सामान, हलक में अटकी अमेरिका की जान, क्या चीन ने चुरा लिया ‘हैवान’?

अमेरिका एक तरफ ईरान के साथ तनाव से जूझ रहा है तो दूसरी ओर उसके लिए एक और बड़ी टेंशन खड़ी हो गई है. ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका ले जाए जा रहे एफ-35 लड़ाकू विमान के पुर्जे अचानक हॉन्गकॉन्ग भेज दिए गए और वे गायब हो गए. टाइम्स ऑफ इजरायल ने पॉलिटिको की रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी है. इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि चीन को शायद फाइटर जेट की बेहद गोपनीय टेक्नोलॉजी मिल गई हो. इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी.

दुश्मन देश कर सकता है रिवर्स इंजीनियरिंग
पॉलिटिको का कहना है कि पेंटागन ने इन पुर्जों के गायब होने की पुष्टि की है. यह घटना गर्मियों में हुई थी. पेंटागन ने कहा कि उसे F-35 लाइटनिंग II के बेकार हो चुके पुर्जों की शिपमेंट से जुड़ी समस्या के बारे में पता है और वह उन्हें वापस पाने की कोशिश कर रहा है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। गायब हुए पुर्जों में जेट की कैनोपी (कॉकपिट का ऊपरी हिस्सा) भी शामिल है. इसमें खास स्टील्थ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जो सिर्फ अमेरिका और उसके सहयोगियों (जिनमें इजरायल भी शामिल है) के पास है. अगर कोई विरोधी देश इसे हासिल कर ले, तो वह इसे रिवर्स-इंजीनियर कर सकता है.

क्यों पुर्जों को भेजा गया हॉन्गकॉन्ग?
पॉलिटिको के मुताबिक, यह साफ नहीं है कि F-35 बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन की ओर से एक बिचौलिये के जरिए ले जाए जा रहे पुर्जों को हॉन्गकॉन्ग क्यों भेजा गया. सूत्रों ने पॉलिटिको को बताया कि जून में कांग्रेस की अहम राष्ट्रीय सुरक्षा कमेटियों और विदेश व रक्षा विभाग के अधिकारियों को इस मामले की जानकारी दी गई थी, और आने वाले हफ्तों में इस पर और बैठकें होंगी.

पेंटागन के F-35 जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने एक बयान में कहा कि उसे F-35 लाइटनिंग II के खराब हो चुके पार्ट्स के शिपमेंट से जुड़ी समस्या के बारे में पता है. ऑफिस ने आगे कहा कि वह अमेरिकी अधिकारियों और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर इन पार्ट्स को वापस लाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने पर काम कर रहा है.

US के सीक्रेट प्रोग्राम्स के पीछे पड़ा चीन
शिपमेंट का अचानक चीन के स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन यानी हॉन्गकॉन्ग की ओर मुड़ जाना उसे बीजिंग के प्रभाव क्षेत्र में ले आता. हाल के सालों में चीन ने शहर पर अपनी पकड़ मजबूत की है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े ऐसे कड़े कानून लागू किए हैं, जिनसे चीनी अधिकारियों को हॉन्गकॉन्ग की राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने और असहमति को दबाने की छूट मिलती है. चीन पहले ही F-35 समेत पेंटागन के गुप्त प्रोग्राम्स की बड़े पैमाने पर जासूसी कर चुका है.

हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के पूर्व स्टाफ मेंबर और कांग्रेस रिसर्च सर्विस के मिलिट्री एविएशन एनालिस्ट जे.जे. गर्टलर ने कहा, ‘यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि चीन इलेक्ट्रॉनिक जासूसी और दूसरे तरीकों से F-35 का डेटा हासिल करने की आक्रामक कोशिशें कर रहा है.’ उन्होंने कहा, ‘लेकिन भले ही उनके पास उस पार्ट के स्पेसिफिकेशन्स या दूसरा डेटा पहले से मौजूद हो, असली पार्ट हाथ लगने से उन्हें और भी जानकारी मिल सकती है और वे जो कुछ भी पहले से जानते थे, उसकी पुष्टि कर सकते हैं या उसमें सुधार कर सकते हैं.’

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