
वॉशिंगटन। रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर अमेरिका में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की तैयारी से भारत पर भी दबाव बढ़ सकता है। अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मंगलवार को 214211 के अंतर से प्रक्रियात्मक मंजूरी दे दी। अब विधेयक पर अंतिम मतदान होना है।
इस विधेयक का आधिकारिक नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। सीनेट इसे पहले ही 8611 के भारी बहुमत से पारित कर चुका है। प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर भारी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देगा।
भारत समेत इन देशों पर लग सकता है 100% तक टैरिफ
विधेयक में रूस के तेल और गैस के प्रमुख खरीदार देशों पर कार्रवाई का प्रावधान है। मौजूदा प्रस्ताव में भारत के साथ चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम संभावित लक्षित देशों के रूप में सामने आया है। इन देशों पर रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने की स्थिति में 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 100 प्रतिशत टैरिफ अभी भारत पर लागू नहीं हुआ है। इसके लिए विधेयक को हाउस से पारित होना और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।
सीनेट से मिल चुकी है मंजूरी
‘लिंडसे ओ. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में 8611 वोट से पारित किया था। विधेयक रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों को मजबूत करने के साथ उसके तेल निर्यात और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई का प्रावधान करता है।
हाउस में क्या हुआ?
अमेरिकी हाउस ने मंगलवार को विधेयक को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव को 214211 वोट से मंजूरी दी। इसके बाद बिल अंतिम मतदान के करीब पहुंच गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, हाउस में अंतिम वोट की प्रक्रिया बुधवार/गुरुवार के आसपास आगे बढ़ सकती है। हाउस में विधेयक को लेकर विरोध भी सामने आया है। कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार दिए जाने पर आपत्ति जताई है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि इससे रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह बिल?
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। ऐसे में यदि अमेरिकी कानून के तहत भारत को लक्षित देशों में शामिल किया जाता है और राष्ट्रपति 100 प्रतिशत तक टैरिफ लागू करते हैं, तो भारतअमेरिका व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, बिल में 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात है, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर स्वत 100 प्रतिशत शुल्क लागू हो जाएगा। वास्तविक शुल्क की दर और उसके इस्तेमाल का फैसला आगे की प्रक्रिया तथा अमेरिकी प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगा।
आगे क्या होगा?
हाउस में अंतिम मतदान के बाद विधेयक को कानून बनने के लिए अमेरिकी विधायी प्रक्रिया के अगले चरण से गुजरना होगा। यदि यह कानून बनता है और भारत को इसके तहत लक्षित किया जाता है, तो रूस से भारतीय ऊर्जा आयात और भारतअमेरिका व्यापार पर इसका असर महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।