
लखनऊ, अमृत विचार : किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में हेपेटाइटिस वायरल लोड जांच एक बार फिर ठप हो गई है। जांच किट उपलब्ध न होने के कारण मरीजों को मजबूरी में निजी पैथोलॉजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है, जहां उन्हें जांच के लिए अतिरिक्त शुल्क देना पड़ रहा है।
केजीएमयू में प्रतिदिन करीब 40 से 50 मरीजों की हेपेटाइटिस वायरल लोड जांच लिखी जाती है। नोडल सेंटर होने के कारण आसपास के कई जिलों से भी सैंपल जांच के लिए यहां भेजे जाते हैं। इसके चलते संस्थान की लैब में रोजाना करीब 70 से 90 सैंपल की जांच होती थी। चिकित्सकों के अनुसार हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों के इलाज में वायरल लोड जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर दवाओं की डोज तय करते हैं और इलाज की प्रभावशीलता की निगरानी करते हैं। जांच में देरी होने से मरीजों के उपचार पर असर पड़ सकता है।
बताया जा रहा है कि जांच के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से बजट उपलब्ध कराया जाता है। बजट मिलने में देरी के कारण जांच किट की आपूर्ति प्रभावित हुई और लैब में किट खत्म हो गई। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके बाद ओपीडी में सैंपल कलेक्शन रोक दिया गया और विभागों को भी नए सैंपल नहीं लेने के निर्देश दिए गए।
जांच बंद होने से मरीजों को निजी केंद्रों पर जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें वायरल लोड जांच के लिए 2500 से 3500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन गया है।
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि जांच किट की व्यवस्था कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि अगले माह से वायरल लोड जांच दोबारा शुरू करा दी जाएगी, जिससे मरीजों को हो रही परेशानी दूर हो सके।