
वीके सिंह, लखनऊ : अंबेडकरनगर, बलिया और हापुड़ जैसे जिलों में कप्तान एवं एंटी करप्शन विभाग में डीआईजी रहे पूर्व आईपीएस रामस्वरूप अपने बेटे की मौत के मामले में विवेचक से परेशान है। उन्होंने मंगलवार को डीजीपी कार्यालय पहुंचकर गुहार लगाई कि उनके बेटे की मौत के मामले में हो रही जांच में विवेचक एकपक्षीय निर्णय ले रहा है, जिससे आरोपी बच रहे हैं। मामला सुनकर डीजीपी ने विवेचक, एसीपी एवं पूर्व डीआईजी, तीनों को तीन सितंबर को मुख्यालय में बुलाया है, ताकि सच सामने आ सके।
गौरतलब हो कि पूर्व आईपीएस अधिकारी रामस्वरूप के बेटे आशीष प्रियदर्शी की 2023 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। आरोप है कि आशीष प्रियदर्शी की मोमबत्ती की फैक्ट्री में कार्यरत कार्मिकों ने आशीष को जहरीला पदार्थ देदेकर मार डाला। वह बिना मातापिता की जानकारी के कानपुर से लेकर लखनऊ तक कई अस्पतालों में भर्ती रहे। एफआईआर नहीं दर्ज होने की स्थिति में अदालत का दरवाजा खटखटाया, जहां से आदेश होने पर बंथरा थाने में कार्मिक प्रियंका, संजय, सुशील, चंद्र प्रताप, गोपाल आदि पर विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज किया गया।
पूर्व आईपीएस रामस्वरूप और उनकी पत्नी उमा देवी का कहना है कि मामले की जांच कर रहे विवेचक निष्पक्ष होकर जांच नहीं कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच हो और उनकी बातें सुनी जाएं तथा उनके द्वारा दिए जा रहे साक्ष्यों को स्वीकार किए जाएं, इसके लिए वह मंगलवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचे और डीजीपी राजीव कृष्ण के समक्ष अपनी बातें रखी। इस दौरान डीजीपी कार्यालय से एसीपी एवं विवेचक को तीन सितंबर को मुख्यालय में तलब किया गया है साथ ही पूर्व डीआईजी से भी कहा गया कि आप भी उपस्थित हों।
2014 में सेवानिवृत्त हुए रामस्वरूप
पूर्व आईपीएस अधिकारी रामस्वरूप 1980 बैच के पीपीएस अधिकारी थे, जो 1994 में प्रमोट होकर आईपीएस बने। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। अंबेडकरनगर, बलिया और हापुड़ जैसे जिलों में कप्तान रहे। बाद में प्रमोट होकर एंटी करप्शन विभाग में डीआईजी बने। 2014 में सेवानिवृत्त हुए, 2 नवंबर 2023 में बेटे की संदिग्ध मौत के बाद वह लगातार न्याय के लिए भटक रहे हैं।