लखीमपुर खीरी हिंसा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे को क्लीन चिट, पुलिस ने SC से कहा कोई सबूत नहीं

लखीमपुर खीरी हिंसा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे को क्लीन चिट, पुलिस ने SC से कहा कोई सबूत नहीं

उत्तर प्रदेश पुलिस ने चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा में गवाहों को धमकाने के मामले पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है. पुलिस ने आज गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि लखीमपुर खीरी मामले में गवाहों को डरानेधमकाने में आशीष मिश्रा शामिल नहीं था. मामले की अगली सुनवाई अगले महीने होनी है.

लखीमपुर खीरी हिंसा पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे को क्लीन चिट, पुलिस ने SC से कहा कोई सबूत नहीं

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसकी जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह पता चले कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में गवाहों को डरानेधमकाने में आशीष मिश्रा या उनके पिता, पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा शामिल थे. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच आशीष की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी.

जांच पूरी, कोई सबूत नहीं मिला पुलिस

आशीष अभी भी जमानत पर बाहर है और कोर्ट इस केस की सुनवाई की प्रगति पर नजर रख रहा है. बेंच को राज्य की ओर से पेश किए गए स्टेटस रिपोर्ट के बारे में बताया गया, जिसके अनुसार गवाहों को डरानेधमकाने के आरोप वाली FIR की जांच पूरी हो गई है और आशीष के खिलाफ दोषी ठहराए जाने लायक कोई सबूत नहीं मिला था.

कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट की बातों को रिकॉर्ड में रख लिया और नोट किया कि अमनदीप सिंह नाम के शख्स के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी और सक्षम कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया था. हालांकि, अजय मिश्रा उर्फ टेनी, आशीष मिश्रा और अन्य लोगों की कथित भूमिका के संबंध में, जांच में यह निष्कर्ष निकला कि वे कथित मामले में शामिल नहीं थे. स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि 64 गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है. मामले पर अगले महीने सुनवाई होगी.

अतिरिक्त हलफनामा के लिए 2 हफ्ते का वक्त

बेंच ने शिकायतकर्ता को स्टेटस रिपोर्ट के जवाब में अतिरिक्त हलफनामा दायर करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया. गवाहों को डरानेधमकाने के आरोप में यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में FIR दर्ज की थी. यह कदम सुप्रीम कोर्ट की ओर से पुलिस की कड़ी आलोचना के बाद उठाया गया था, क्योंकि पुलिस ने बलजिंदर सिंह की शिकायत पर कोई कार्रवाई ही नहीं की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें अपना बयान वापस लेने की धमकी दी गई थी.

पुलिस की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि गवाह अपना बयान दर्ज कराने के लिए आगे नहीं आया. तब कोर्ट ने एक वरिष्ठ अधिकारी को शिकायतकर्ता के पास जाकर उसका बयान दर्ज करने का निर्देश दिया. बाद में, लखीमपुर के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस ने पंजाब के मुक्तसर में शिकायतकर्ता का पता लगाया और उसका बयान दर्ज किया. बाद में भारतीय दंड संहिता , 1860 की धारा 195A, 506 और 120B के तहत अपराधों के लिए केस दर्ज कर लिया.

यह केस उत्तर प्रदेश में 3 अक्टूबर, 2021 की लखीमपुर खीरी घटना से जुड़ा हुआ है, जिसमें 4 किसानों सहित 8 लोगों की मौत हो गई थी. यह हिंसा तब भड़क उठी थी जब आशीष मिश्रा से कथित तौर पर जुड़े काफिले की गाड़ियों ने विरोध कर रहे किसानों को कुचल दिया था. आशीष उस केस में मुकदमे का सामना कर रहे हैं और फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर बाहर हैं.

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