वंदे भारत Vs तेजस एक्सप्रेस, स्पीड के मामले में कौन सबसे आगे?

वंदे भारत Vs तेजस एक्सप्रेस, स्पीड के मामले में कौन सबसे आगे?

बेंगलुरु और मुंबई के बीच वंदे भारत चलाने की तैयारी है. यह स्लीपर वंदेभारत होगी. यात्रा से 24 घंटे का सफर 16 घंटे का हो सकता है. रेल यात्रियों को जल्द तेज और आरामदायक सफर का विकल्प मिल सकता है. वंदे भारत और तेजस दोनों ही प्रीमियम कैटेगरी की ट्रेन हैं. दोनों में ही जनरल क्लास जैसी कोई सुविधा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद दोनों में कई अंतर हैं.

वंदे भारत को भारतीय रेलवे खुद संचालित करती है और इसे सेमीहाईस्पीड प्रीमियम ट्रेन के तौर पर पेश किया गया. यह टेक्नोलॉजी और स्पीड के लिहाज से प्रीमियम, लेकिन किराया आम जनता की पहुंच में रखा गया है ताकि आम पैसेंजर भी शताब्दी जैसी सुविधाएं ज्यादा किफायती दाम पर ले सके. इसमें चेयर कार और एग्जीक्यूटिव क्लास दोनों विकल्प मिलते हैं.

तेजस एक्सप्रेस असल मायनों में ज्यादा कॉर्पोरेटस्टाइल प्रीमियम ट्रेन है. यह भारत की पहली ऐसी ट्रेन है जिसे रेलवे की बजाय IRCTC चलाती है. इसका किराया वंदे भारत के मुकाबले ज्यादा होता है. जानिए, दोनों ट्रेनों में किसकी स्पीड ज्यादा है?

किसकी रफ्तार तेज?

वंदे भारत लोकोमोटिव इंजन वाली पहली स्वदेशी सेमीहाईस्पीड ट्रेन है. इसे चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनाया गया है. इसमें आगे की तरफ कोई इंजन नहीं होता जो पीछे के कोच को खींचता हो बल्कि मेट्रो ट्रेन की तरह ही इसके हर कोच में मोटर लगी होती है. वंदे भारत की टॉप स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन इसकी ऑपरेशनल स्पीड 130 किलोमीटर प्रति घंटा से 160 किलोमीटर प्रति घंटा है. यानी यह यात्रियों को लेकर टॉप स्पीड से नहीं चलती. इसकी ऑपरेशनल स्पीड 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है वो भी ट्रैक की सुरक्षा स्थितियों के आधार पर.

वंदे भारत.

अब तेजस की स्पीड को समझ लेते हैं. तेजस की टेस्ट की गई टॉप स्पीड 200 किलोमीटर प्रति किलोमीटर है, लेकिन सफर के लिए 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है. यह स्टेशनों, घुमावों और सिग्नलों के आधार पर तेज़ी से स्पीड पकड़ती और कम करती है.

डिजाइन स्पीड वाली ट्रेन

तकनीकी क्षमता या डिजाइन स्पीड की बात करें तो तेजस एक्सप्रेस 200 किमी प्रति घंटा तक की स्पीड से चलने में सक्षम है, भले ही इसकी ऑपरेशनल स्पीड कम है. यह भारत की परंपरागत श्रेणी की ट्रेनों में सबसे ज्यादा डिजाइन स्पीड वाली ट्रेन मानी जाती है. इसके मुकाबले वंदे भारत एक्सप्रेस की डिजाइन स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है. यानी कागजों पर, स्पीड कैपेसिटी के लिहाज से तेजस, वंदे भारत से 20 किमी प्रति घंटा आगे है.

तेजस एक्सप्रेस.

ऑपरेशनल स्पीड में दोनों बराबर

असली सवाल यह है कि पटरी पर असल में कौन ज्यादा तेज दौड़ती है? यहां दिलचस्प बात यह है कि ट्रैक की मौजूदा सीमाओं की वजह से दोनों ट्रेनें अपनी पूरी डिजाइन स्पीड पर नहीं चल पातीं. मौजूदा हालात में तेजस और वंदे भारत, दोनों ही ऑपरेशनली करीब 160 किमी प्रति घंटा तक सीमित हैं. यानी रोजमर्रा के सफर में यात्री दोनों ट्रेनों में लगभग बराबर रफ्तार का अनुभव करते हैं, भले ही तेजस की तकनीकी क्षमता ज्यादा हो.

एक्सिलरेशन का मतलब भी समझें

स्पीड सिर्फ अधिकतम रफ्तार से नहीं, बल्कि यह भी मायने रखता है कि ट्रेन कितनी तेजी से रफ्तार पकड़ती है. वंदे भारत एक सेल्फप्रोपेल्ड ट्रेनसेट है, जिसमें डिस्ट्रिब्यूटेड पावर सिस्टम लगा है. इसका मतलब है कि पूरी ट्रेन में मोटरें बंटी होती हैं, अलग इंजन नहीं जोड़ना पड़ता. इस वजह से यह पारंपरिक लोकोमोटिवहोल्ड ट्रेनों के मुकाबले तेजी से स्पीड पकड़ती और धीमी होती है, जिससे स्टॉप के बीच का औसत सफर समय कम हो जाता है. तेजस एक्सप्रेस पारंपरिक इंजनकोच मॉडल पर चलती है, इसलिए एक्सिलरेशन के मामले में यह वंदे भारत जितनी फुर्तीली नहीं मानी जाती.

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