विजय माल्या से ED ने कितने पैसे वसूले, कितना बाकी? पूरी डिटेल

विजय माल्या से ED ने कितने पैसे वसूले, कितना बाकी? पूरी डिटेल

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और भारतीय बैंकों के बीच करीब एक दशक से चल रही कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुर्खियों में है. बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान माल्या के वकीलों ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय के जरिए किंगफिशर एयरलाइंस मामले में करीब 14,131.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां SBI के नेतृत्व वाले बैंक कंसोर्टियम को वापस की जा चुकी हैं. इसके लिए मुंबई, बैंगलोर और गोवा सहित कई राज्यों में माल्या की चलअचल संपत्तियां नीलाम की गईं. मुंबई एयरपोर्ट के पास स्थित किंगफिशर का ऑफिस, गोवा की करोड़ों की प्रॉपर्टी और बैंगलोर में ऑफिसघरजमीन तक बेची गई. माल्या पक्ष का कहना है कि डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल के मुताबिक उन पर कुल 6,203 करोड़ रुपये की देनदारी बनती थी, जिस पर 11.5% सालाना ब्याज भी लागू था और इस देनदारी से कहीं ज्यादा रकम अब तक वसूली जा चुकी है. लेकिन बैंकों के अपने आंकड़े इस दावे से मेल नहीं खाते, जिससे मामला अब भी उलझा हुआ है.

माल्या और उनके वकील लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि बैंकों ने जरूरत से ज्यादा वसूली कर ली है. इससे पहले संसद में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि ईडी के माध्यम से बैंकों ने 6,203 करोड़ रुपये के लोन की तुलना में 14,131.6 करोड़ रुपये वसूल किए हैं. इसी जानकारी को आधार बनाकर माल्या ने कई बार सोशल मीडिया और अदालत, दोनों जगह यह दावा दोहराया कि बकाया कर्ज से कहीं अधिक रकम वापस ली जा चुकी है. एक मौके पर तो माल्या ने खुद कहा था कि डेब्ट रिकवरी ट्रायब्यूनल ने किंगफिशर एयरलाइंस का लोन 6,203 करोड़ रुपये आंका था, जिसमें करीब 1,200 करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर शामिल था. यही आंकड़ा अब बॉम्बे हाईकोर्ट में भी उनके वकीलों की दलील का आधार बना है, जिसमें कहा गया कि बैंकों और ED की कार्रवाई के बाद उनकी मूल याचिका का औचित्य लगभग खत्म हो चुका है, क्योंकि जिस संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए याचिका दायर की गई थी, वह पहले ही नीलाम होकर बैंकों तक पहुंच चुकी है.

बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, ED और SBI से मांगी पूरी रिपोर्ट

हाल की सुनवाई में बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख भी काफी तल्ख रहा. अदालत ने साफ कहा कि यह मूल रूप से एक व्यावसायिक विवाद है और अब इसे खत्म होना चाहिए, क्योंकि करीब एक दशक से खिंच रहे इस मामले का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. कोर्ट ने ED को निर्देश दिया कि वह जब्त और नीलाम की गई संपत्तियों की पूरी और स्पष्ट रिपोर्ट दाखिल करे, ताकि यह तय हो सके कि वसूली की प्रक्रिया वाकई पूरी हो चुकी है या अभी कुछ बकाया है. इसी तरह SBI को भी अपनी तरफ से रिकवरी का ब्योरा अदालत में पेश करने को कहा गया है.

बैंकों का अलग हिसाब

इन सभी में सबसे दिलचस्प बात यह है कि बैंकों के आंकड़े माल्या के दावे से पूरी तरह मेल नहीं खाते. SBI के नेतृत्व वाले बैंकों ने एक अलग हिसाब में कुल देनदारी करीब 17,471 करोड़ रुपये बताई थी, जिसमें से 10,814.54 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि करीब 6,656.96 करोड़ रुपये अब भी बकाया है. माल्या के वकीलों ने बैंकों के इसी आंकड़े को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है और सवाल उठाया है कि जब सरकार खुद संसद में 14,131.6 करोड़ रुपये की वसूली की पुष्टि कर चुकी है, तो बैंक अलग आंकड़ा पेश क्यों कर रहे हैं.

देनदारी अभी पूरी तरह साफ नहीं

यह जरूर है कि 14,131.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां बैंक कंसोर्टियम को वापस की जाना आधिकारिक रूप से दर्ज तथ्य है, लेकिन इससे यह अपने आप साबित नहीं हो जाता कि माल्या की पूरी कानूनी देनदारी खत्म हो चुकी है, क्योंकि संपत्ति की नीलामी से मिली रकम और असल में बैंकों के खाते में जमा हुई वसूली, दोनों में फर्क हो सकता है. यही वजह है कि अदालत ने दोनों पक्षों ED और SBI से अलगअलग रिपोर्ट मांगी है, ताकि एक साफ और अंतिम आंकड़ा सामने आ सके. फिलहाल मामला अभी सुलझा नहीं है और अगली सुनवाई में ही यह साफ होगा कि विजय माल्या पर वाकई अब कोई देनदारी बची है या नहीं. तब तक माल्या का दावा और बैंकों का हिसाब, दोनों अपनीअपनी जगह कायम हैं और असली तस्वीर ED व SBI की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी.

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