वीजा रिजेक्शन के बाद भी नहीं टूटी उम्मीद! इस मंदिर की मान्यता पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास..

वीजा रिजेक्शन के बाद भी नहीं टूटी उम्मीद! इस मंदिर की मान्यता पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास..
वीजा रिजेक्शन के बाद भी नहीं टूटी उम्मीद! इस मंदिर की मान्यता पर श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास..

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भारत में आस्था और विश्वास के कई अनोखे रंग देखने को मिलते हैं. भगवान के प्रति लोगों की दीवानगी और श्रद्धा के कई किस्से आपने सुने होंगे. लेकिन क्या आपने कभी किसी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है, जहां लोग देवी देवताओं को चढ़ावे में मिठाई या फूल नहीं बल्कि अपना पासपोर्ट और वीजा की फाइल चढ़ाते हैं.

जी हां, दिल्ली और हैदराबाद में बजरंगबली के कुछ ऐसे ही चमत्कारी मंदिर स्थित हैं. इन मंदिरों को लोग अब वीजा वाले हनुमान जी के नाम से जानने लगे हैं.

यहां हर रोज सैकड़ों की तादाद में ऐसे युवा और लोग पहुंच रहे हैं, जिनका विदेश जाने का सपना किसी न किसी वजह से अटका हुआ है. लोगों की गहरी मान्यता है कि यहां आकर अर्जी लगाने से अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का वीजा पलक झपकते ही मिल जाता है.

दिल्ली के नेब सराय में लगती है भक्तों की भारी अदालत

देश की राजधानी दिल्ली के नेब सराय इलाके में वीजा वाले हनुमान जी का एक बेहद मशहूर मंदिर है. इस मंदिर में आपको आम दिनों में भी पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी.

खासकर शनिवार और मंगलवार के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है. दूर दूर से युवा लड़के लड़कियां अपने हाथों में रंग बिरंगे पासपोर्ट और वीजा के जरूरी दस्तावेज लेकर लाइन में खड़े नजर आते हैं.

भक्तों का अटूट विश्वास है कि अगर किसी का वीजा बार बार रिजेक्ट हो रहा है, या एम्बेसी से कॉल नहीं आ रही है, तो यहां आकर हनुमान जी के चरणों में अपनी फाइल रखने से सारे काम अपने आप बन जाते हैं.

हैदराबाद के चिलकुर बालाजी मंदिर से शुरू हुई थी यह अनोखी परंपरा

वीजा वाले भगवान की यह अनोखी और दिलचस्प परंपरा सबसे पहले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बॉर्डर पर शुरू हुई थी. हैदराबाद के करीब स्थित चिलकुर बालाजी मंदिर को देश का पहला वीजा मंदिर कहा जाता है.

ये मंदिर भगवान वेंकटेश्वर यानी बालाजी का है. माना जाता है कि साठ और सत्तर के दशक में जब भारत के आईटी प्रोफेशनल्स और छात्रों का अमेरिका जाने का क्रेज बढ़ा, तब कई युवाओं के वीजा रिजेक्ट होने लगे थे.

ऐसे में कुछ छात्रों ने यहां आकर मन्नत मांगी और उनका वीजा तुरंत लग गया. बस तभी से इस मंदिर का नाम वीजा बालाजी पड़ गया और आज भी लोग यहां पासपोर्ट लेकर मन्नत मांगने आते हैं.

पासपोर्ट को भगवान के चरणों में छुआकर लगाई जाती है परिक्रमा

इन मंदिरों में मन्नत मांगने का तरीका भी बेहद अलग और दिलचस्प है. मंदिर पहुंचने के बाद भक्त सबसे पहले हनुमान जी या बालाजी भगवान के दर्शन करते हैं.

इसके बाद वे अपने ओरिजिनल पासपोर्ट या वीजा की जेरॉक्स कॉपी को भगवान के चरणों से स्पर्श कराते हैं. कई मंदिरों में मन्नत पूरी करने के लिए भगवान की मूर्ति के इर्द गिर्द 11 या 21 बार परिक्रमा करने का नियम है.

लोग पूरी श्रद्धा के साथ हाथ में अपनी फाइल थामे भगवान का नाम जपते हुए चक्कर काटते हैं. मंदिर के पुजारियों के मुताबिक भगवान के लिए कोई भी काम असंभव नहीं है, इसलिए वे भक्तों की राह में आने वाली हर कानूनी और कागजी अड़चन को दूर कर देते हैं.

मन्नत पूरी होने पर नारियल चढ़ाने और धन्यवाद करने दोबारा आते हैं लोग

सोशल मीडिया और इंटरनेट के इस दौर में इन मंदिरों की ख्याति अब सात समंदर पार तक पहुंच चुकी है. केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में रहने वाले भारतीय भी अपने रिश्तेदारों के जरिए यहां अर्जियां लगवा रहे हैं.

मंदिर परिसर में आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जो अपनी मन्नत पूरी होने के बाद भगवान का शुक्रिया अदा करने आते हैं. नियम के अनुसार जब किसी भक्त का वीजा आ जाता है, तो वह दोबारा मंदिर आकर भगवान को नारियल, मिठाई या लाल चोला चढ़ाता है.

विज्ञान और आधुनिकता के इस युग में भी ‘वीजा वाले हनुमान जी’ के प्रति लोगों का यह अनोखा भरोसा लगातार बढ़ता ही जा रहा है.

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