
दुनिया के अलगअलग देशों में विवाह से जुड़ी परंपराएं अपने आप में बेहद रोचक हैं। कहीं शादी से पहले दूल्हादुल्हन को विशेष रस्में निभानी पड़ती हैं, तो कहीं रिश्तेदार और दोस्त अनोखे तरीकों से नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हैं। जर्मनी की ‘पोल्टरएबेंड’ भी ऐसी ही एक अनूठी और दिलचस्प विवाह परंपरा है। इस रस्म में शादी से एक रात पहले मेहमान चीनी मिट्टी के बर्तन, प्लेट और दूसरे टूटने वाले सामान जमीन पर पटककर तोड़ते हैं। पहली नजर में यह परंपरा अजीब लग सकती है, लेकिन जर्मन संस्कृति में इसे नवविवाहित जोड़े के लिए सौभाग्य और सुखसमृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पोल्टरएबेंड का आयोजन आमतौर पर शादी से एक रात पहले किया जाता है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके लिए दूल्हादुल्हन के परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी और दोस्त एकत्र होते हैं। यह आयोजन प्राय दुल्हन के घर या उसके सामने होता है। मेहमान अपने साथ पुराने चीनी मिट्टी के प्लेट, कप, कटोरे, फूलदान या अन्य ऐसी वस्तुएं लेकर आते हैं, जिन्हें आसानी से तोड़ा जा सके। मेहमान इन बर्तनों को जमीन पर पटककर तोड़ते हैं। बर्तनों के टूटने से पैदा होने वाली तेज आवाज पूरे माहौल को उत्सव और उल्लास से भर देती है। इसके बाद दूल्हादुल्हन मिलकर जमीन पर बिखरे टुकड़ों की सफाई करते हैं। यही इस रस्म का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
पोल्टरएबेंड के पीछे सदियों पुरानी लोकमान्यता जुड़ी हुई है। माना जाता है कि बर्तनों के टूटने की आवाज नकारात्मक शक्तियों और दुर्भाग्य को दूर करती है तथा दूल्हादुल्हन के वैवाहिक जीवन में सौभाग्य लेकर आती है। जर्मनी में प्रचलित एक कहावत भी इस परंपरा से जुड़ी है कि टूटे हुए बर्तन सौभाग्य लाते हैं। इस रस्म को केवल मनोरंजन के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि इसे नए वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। बर्तन टूटने के बाद उनके टुकड़ों को मिलकर साफ करना भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है विवाह के बाद आने वाली परेशानियों और जिम्मेदारियों का सामना पतिपत्नी को मिलकर करना होगा।
पोल्टरएबेंड में हर तरह की चीज तोड़ना परंपरा का हिस्सा नहीं है। विशेष रूप से कांच को तोड़ने से बचा जाता है। जर्मन मान्यता में कांच टूटना दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है। इसलिए इस रस्म में मुख्य रूप से चीनी मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अलगअलग परिवारों और क्षेत्रों में इस परंपरा को निभाने के तरीके में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
पोल्टरएबेंड सिर्फ बर्तन तोड़ने की रस्म नहीं है। कई स्थानों पर इसे एक छोटे उत्सव की तरह मनाया जाता है। परिवार और दोस्त दूल्हादुल्हन के लिए खेल, मजेदार गतिविधियां और छोटेछोटे कार्यक्रम आयोजित करते हैं। भोजन, बातचीत और हंसीमजाक के बीच शादी से पहले का यह आयोजन रिश्तेदारों और दोस्तों को करीब आने का अवसर भी देता है। इस परंपरा का एक सामाजिक महत्व भी है। शादी के दिन जहां मुख्य ध्यान विवाह समारोह पर रहता है, वहीं पोल्टरएबेंड में दूल्हादुल्हन अपने करीबी लोगों के साथ अनौपचारिक माहौल में समय बिताते हैं। परिवार और मित्र इस आयोजन के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं और आने वाले वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद देतें हैं।