
मध्य प्रदेश के उज्जैन में द्वारकाधीश गोपाल मंदिर के सामने स्थित शाही मस्जिद के पास स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। दरअसल, सड़क चौड़ीकरण की योजना के तहत मस्जिद के हिस्से को हटाने की तैयारी के दौरान वहां मौजूद लोगों और पुलिस के बीच तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते विरोध बढ़ गया और कुछ लोगों ने पुलिस टीम पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। स्थिति को नियंत्रण में लाने और भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। जिसके बाद सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को बैरिकेड कर दिया गया है।
भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
घटना के बाद प्रशासन ने गोपाल मंदिर के आसपास के 500 मीटर के दायरे में आवाजाही पूरी तरह रोक दी है। माहौल को शांत रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मौके पर 2000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। साथ ही, आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है।
11 फीट हिस्से को हटाने को लेकर बनी सहमति
पूरी रात चले गतिरोध के बीच प्रशासनिक अधिकारियों और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। देर रात तक चली बैठकों के बाद सुबह करीब पांच बजे यह खबर आई कि मस्जिद के लगभग 11 फीट हिस्से को स्वेच्छा से हटाने पर एक राय बनी है। अधिकारियों का कहना है कि यह सहमति बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने के उद्देश्य से बनाई गई है, ताकि शहर के यातायात सुधार का काम बाधित न हो।
1.5 किलोमीटर लंबे सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट का हिस्सा
नगर निगम की योजना के अनुसार, कोयला फाटक से शुरू होकर कंठाल, सती गेट, बड़ा सराफा और छत्री चौक होते हुए गोपाल मंदिर तक करीब 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। बड़ा सराफा तक का काम पूरा हो चुका है, लेकिन छत्री चौक से गोपाल मंदिर के बीच का काम अटका हुआ था। नगर निगम का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण की जद में मस्जिद का एक तरफ 4 फीट और दूसरी तरफ 9 फीट का ढांचा आ रहा है, जिसे हटाना बेहद जरूरी है।
अदालत का दरवाजा और कानूनी लड़ाई की तैयारी
प्रशासनिक नोटिस के खिलाफ मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की थी, जो खारिज हो चुकी है। अब समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने डबल बेंच में अपील की है और जरूरत पड़ने पर वे सुप्रीम कोर्ट का रुख भी करेंगे। मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम का कहना है कि धार्मिक स्थलों को बचाते हुए चौड़ीकरण का रास्ता निकाला जाना चाहिए, वहीं समाज के प्रतिनिधियों ने इसे 636 साल पुराना ऐतिहासिक ढांचा बताया है।
ऐतिहासिक दावों पर विशेषज्ञों की अलग राय
शाही मस्जिद को 636 वर्ष पुराना और 1390 में निर्मित बताने के दावे पर पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. शुभम केवलिया ने सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, इस दावे की पुष्टि के लिए कोई ठोस ऐतिहासिक या पुरातात्विक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उज्जैन की सबसे पुरानी मस्जिद के रूप में ऐतिहासिक संदर्भों में ‘बिना नीम की मस्जिद’ का उल्लेख मिलता है। फिलहाल, कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक तालमेल के बीच पूरे मामले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।