Quick Samachar: देश के सबसे बड़े शेयर बाजार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने आगाह किया है कि नियामकीय बदलाव, प्रौद्योगिकी विफलताओं, साइबर हमले और एआई से जुड़े जोखिम, साथ ही वायदाविकल्प कारोबार से होने वाली आय पर इसकी भारी निर्भरता उसके वित्तीय प्रदर्शन एवं कारोबार संचालन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है.

शेयर बाजार में करते हैं ट्रेडिंग तो हो जाएं सावधान, 11 मिनट में 39.5 करोड़ की गड़बड़ी की मिली शिकायत​
शेयर बाजार में करते हैं ट्रेडिंग तो हो जाएं सावधान, 11 मिनट में 39.5 करोड़ की गड़बड़ी की मिली शिकायत​

ने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में वेबसाइट ठप होने, बाजार आंकड़ों में गड़बड़ी, लॉगइन में बाधा और वायदाविकल्प से जुड़ी जानकारी में त्रुटियां सामने आई हैं. फरवरी, 2021 की घटना का जिक्र करते हुए एक्सचेंज ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ी के कारण जोखिम प्रबंधन, समाशोधन, निपटान और निगरानी प्रणाली प्रभावित हुई थी और पांच घंटे से अधिक समय तक सभी खंडों में कारोबार ठप रहा. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने साइबर सुरक्षा के संदर्भ में बताया कि मई, 2025 में उसकी वेबसाइट पर एक बहुत बड़ा डीडीओएस हमला हुआ था, जिसमें सिर्फ 11 मिनट में लगभग 39.5 करोड़ शिकायत दर्ज किए गए.

ऑप्शंस ट्रेडिंग का योगदान 60.22 फीसदी

एनएसई ने बुधवार को दाखिल अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम से जुड़े दस्तावेजों में कहा कि वित्त वर्ष 202526 में उसके परिचालन राजस्व का 78.65 प्रतिशत लेनदेन शुल्क से आया, जिसमें केवल ऑप्शंस ट्रेडिंग का योगदान 60.22 प्रतिशत रहा. इसने कहा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड द्वारा इक्विटी वायदाविकल्प ढांचे को मजबूत करने के लिए हाल में किए गए नियामकीय उपायों के कारण नकद और वायदाविकल्प दोनों खंडों में कारोबार गतिविधियों में कमी आई है, जिससे वित्त वर्ष 202526 में कारोबार से आय घटी.

NSE ने किया आगाह, हो जाएं सचेत

एनएसई ने आगाह किया कि नियमों में और कड़ाई, अधिक लेनदेन कर, निवेशकों की पसंद में बदलाव या वैकल्पिक परिसंपत्ति वर्गों की ओर रुझान का असर आपके मुनाफे पर सकता है. इसने व्यापक नियामकीय जोखिमों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वह लगातार सेबी की निगरानी, निरीक्षण एवं प्रवर्तन कार्रवाई के दायरे में रहता है. उसे संचालन, शासन, प्रौद्योगिकी और अनुपालन से जुड़े मामलों में कारण बताओ नोटिस, चेतावनी पत्र और परामर्श मिल चुके हैं. एनएसई ने बताया कि हाल के वर्षों में उसे बड़े निपटान खर्च उठाने पड़े हैं, जिनमें अक्टूबर 2024 में ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट संरचना और नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़े मामले में 643 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान शामिल है. जुलाई, 2025 में भी उसने 40.35 करोड़ रुपये का भुगतान एक अन्य निपटान आदेश के तहत किया. इसने कहा कि कोलोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले सहित कई कानूनी एवं नियामकीय कार्यवाही अभी लंबित हैं, जिनका वित्तीय तथा प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है. पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग व्यवस्था के कारण प्रौद्योगिकी विफलता और साइबर सुरक्षा घटनाओं को प्रमुख परिचालन जोखिम बताया गया है.

AI का तेजी से बढ़ रहा उपयोग

एनएसई ने एआई और मशीन लर्निंग को उभरते जोखिम क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया. इसने कहा कि निगरानी, जोखिम प्रबंधन और ग्राहक सेवाओं में एआई का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन गलत या पक्षपाती आंकड़ों के कारण इससे गलत निष्कर्ष निकल सकते हैं. इससे संचालन और वित्तीय नुकसान या नियमों के उल्लंघन का खतरा है. इसने आगाह किया कि एआई आधारित और एल्गोरिदमिक कारोबार रणनीतियों के बढ़ते उपयोग से बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और कीमतों में अचानक उतारचढ़ाव आ सकता है. साथ ही हेरफेर के नए तरीके भी सामने आ सकते हैं, जिन्हें पहचानना कठिन होगा. आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार, एआई आधारित साइबर हमले, डीपफेक के जरिये पहचान की नकल, तीसरे पक्ष के एआई उपकरणों से डेटा लीक और एआई आधारित कोडिंग से जुड़ी कमजोरियां अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती हैं. एनएसई ने कहा कि एआई से जुड़े नियमों में बदलाव से अनुपालन की जरूरतें भी बढ़ सकती हैं जैसे पारदर्शिता, जवाबदेही और ऑडिट से जुड़े नए मानदंड लागू हो सकते हैं.