उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने संगठन के साथसाथ सहयोगियों और उन नेताओं के साथ संवाद बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिनको लेकर हाल के दिनों में सियासी चर्चाएं तेज थीं. शनिवार को इसकी दो तस्वीरें सामने आईं—एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली सदर की बीजेपी विधायक अदिति सिंह से मुलाकात की, तो दूसरी तरफ बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े गोरखपुर में निषाद पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से मिलने उनके कार्यालय पहुंच गए.

दोनों मुलाकातों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन सियासी संदेश एक ही दिशा में जाता दिख रहा है—2027 से पहले अपने खेमे में संवाद और समन्वय को मजबूत करने में जुटी है.
संजय निषाद के मामले में क्यों अहम है तावड़े की मुलाकात?
संजय निषाद पिछले कुछ समय से निषाद समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने लगातार अपनी मांगें रखते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने संकेत दिया था कि अगर समुदाय की मांगों और राजनीतिक हिस्सेदारी को नजरअंदाज किया गया तो पार्टी दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकती है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में तावड़े और संजय निषाद की मुलाकात महत्वपूर्ण हो जाती है.
आज निषाद भवन में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ नेता आदरणीय श्री विनोद तावड़े जी का गरिमामयी आगमन हुआ।
इस अवसर पर परिवार के सदस्यों एवं उपस्थित जनों द्वारा उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। आदरणीय तावड़े जी का निषाद भवन पधारना हम सभी के लिए अत्यंत हर्ष pic.twitter.com/AmANarRTdQ
— Dr. Sanjay Kumar Nishad September 18, 2026
मुलाकात के दौरान निषाद आरक्षण, आंदोलन से जुड़े मुकदमों की वापसी, मजवार और तुरहा समुदाय को परिभाषित करने तथा पार्टी कार्यकर्ताओं को आयोगों में समायोजित करने जैसे मुद्दे उठे. संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर सामाजिक न्याय मंत्रालय के स्तर पर पहल की मांग भी रखी. यानी बातचीत केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि निषाद समाज की लंबित मांगें भी सीधे बीजेपी के प्रदेश प्रभारी के सामने रखी गईं.
गोंडा कांड के बाद बढ़ी राजनीतिक संवेदनशीलता
संजय निषाद की सक्रियता को हाल के गोंडा के विनोद साहनी हत्याकांड के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. निषाद समाज से जुड़े इस मामले के बाद संजय निषाद ने विरोध दर्ज कराया था और विपक्षी दलों ने भी निषाद समाज के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाई. इस घटना ने 2027 से पहले निषाद वोट और सामाजिक समीकरण की अहमियत को फिर चर्चा में ला दिया है. ऐसे समय में तावड़े का सीधे संजय निषाद के कार्यालय पहुंचना गठबंधन के भीतर संवाद बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है.
तावड़े का गोरखपुर दौरा भी सिर्फ एक मुलाकात नहीं
दरअसल, विनोद तावड़े का गोरखपुर दौरा बीजेपी की व्यापक 2027 रणनीति का हिस्सा है. पार्टी ने उन्हें अलगअलग क्षेत्रों में जाकर संगठन की जमीनी स्थिति, कार्यकर्ताओं का फीडबैक और स्थानीय राजनीतिक समीकरण समझने की जिम्मेदारी दी है. गोरखपुर के बाद अवध और फिर काशी क्षेत्र में भी बैठकें प्रस्तावित हैं. ऐसे में गोरखपुर दौरे के दौरान संगठनात्मक बैठकों के बीच संजय निषाद के कार्यालय पहुंचना महज प्रोटोकॉल मुलाकात से आगे का राजनीतिक संदेश भी रखता है.
अदिति सिंह की सीएम योगी से मुलाकात
रायबरेली सदर से बीजेपी विधायक अदिति सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात ऐसे समय हुई, जब उनके कांग्रेस में वापस जाने की अटकलें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई थीं. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से मुलाकात की तस्वीर भी साझा की गई.
आज लखनऊ में यशस्वी मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी से शिष्टाचार भेंट की।
इस अवसर पर रायबरेली सदर के समग्र विकास व जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुमूल्य मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।#UPCM #YogiAdityanath#BJP4UP pic.twitter.com/wYavZuhpKN
— Aditi Singh September 18, 2026
BJP के सामने दो मोर्चे—संगठन और सहयोगी
2027 की लड़ाई में बीजेपी के लिए चुनौती केवल अपने संगठन को मजबूत करने की नहीं है. उसे अपने सहयोगी दलों और सामाजिक समूहों के साथ भी तालमेल बनाए रखना है.
निषाद पार्टी पूर्वांचल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सहयोगी है. ऐसे में संजय निषाद की मांगों को सुनना, उनके साथ सीधे संवाद करना और उन्हें राजनीतिक तौर पर साथ लेकर चलना गठबंधन की रणनीति का हिस्सा है.
इसी तरह रायबरेली की विधायक अदिति सिंह के साथ मुख्यमंत्री की मुलाकात भी ऐसे वक्त हुई, जब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं थीं. मुलाकात की तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद इन अटकलों के बीच एक अलग संदेश गया.
तो क्या BJP कर रही है डैमेज कंट्रोल?
इसे सीधे डैमेज कंट्रोल कहना बीजेपी की ओर से आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई बात नहीं है, लेकिन घटनाक्रम को एक साथ देखें तो बीजेपी की रणनीति में संवाद बढ़ाने और संभावित असंतोष को समय रहते संभालने पर जोर दिखाई देता है.
राजनीतिक तौर पर इन मुलाकातों का सबसे अहम पहलू यही है कि बीजेपी चुनाव से काफी पहले ही नाराजगी, असंतोष और सहयोगी दलों के मुद्दों को लेकर सक्रिय संवाद करती नजर आ रही है. खासकर संजय निषाद के कार्यालय पहुंचकर तावड़े ने यह संकेत जरूर दिया कि निषाद पार्टी और उसके मुद्दे बीजेपी के चुनावी मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.