सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा विभूतिनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, विशेष श्रृंगार से सजे भोलेनाथ

सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा विभूतिनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, विशेष श्रृंगार से सजे भोलेनाथ
सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा विभूतिनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, विशेष श्रृंगार से सजे भोलेनाथ

सिरसिया : सावन के दूसरे सोमवार पर सिरसिया स्थित प्रसिद्ध बाबा विभूतिनाथ मंदिर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। पांडवकालीन इस शिव मंदिर में सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे।

मंदिर के कपाट सुबह चार बजे खुलते ही भक्तों की लंबी कतारें लग गईं। मंदिर परिसर से बाहर तक श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। पूरा वातावरण “हरहर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से भक्तिमय हो उठा।

बाबा विभूतिनाथ का हुआ विशेष श्रृंगार

सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर बाबा विभूतिनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया। दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचे शिवभक्तों ने विधिविधान से भगवान शिव का पूजन किया।

श्रद्धालुओं ने बाबा को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर परिवार की सुखसमृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।

मंदिर परिसर में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। श्रावस्ती के अलावा आसपास के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन रहा अलर्ट

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क रहा। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी। पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते रहे। श्रद्धालुओं को सुचारू रूप से दर्शन कराने के लिए अलगअलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए गए थे।

श्रद्धालुओं के लिए की गईं विशेष व्यवस्थाएं

मंदिर परिसर में साफसफाई, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मंदिर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया और संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक दिशानिर्देश दिए।

पुलिस और प्रशासन की मुस्तैदी के चलते श्रद्धालुओं को दर्शन और जलाभिषेक के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

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