
साल की सभी मासिक शिवरात्रि में सावन शिवरात्रि सबसे खास है. इस दिन शिवलिंग पर कांवड़ में लाया गया गंगाजल अर्पित करने, विशेष पूजा-अर्चना करने की परंपरा है. साथ ही पूरी रात जागकर 4 प्रहर की पूजा भी की जाती है. क्या आप जानते हैं कि सावन शिवरात्रि की रात जागरण करने और 4 प्रहर की पूजा करने के पीछे क्या वजह है? साथ ही आज 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय क्या है?
4 प्रहर क्या हैं?
हिन्दू काल गणना के अनुसार, एक दिन और रात में कुल आठ प्रहर होते हैं, जिसमें दिन के 4 प्रहर और रात के 4 प्रहर होते हैं. इस तरह हर प्रहर में करीब 3 घंटे होते हैं, जिन्हें मिलाकर 24 घंटे बनते हैं. रात के 4 प्रहर का समय और उनके नाम.
पहला प्रहर (प्रदोष काल): शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
दूसरा प्रहर (निशिथ काल का पूर्व भाग): रात 9:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक
तीसरा प्रहर (त्रियामा): रात्रि 12:00 बजे से तड़के 3:00 बजे तक
चौथा प्रहर (उषा काल): तड़के 3:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक
सावन शिवरात्रि पर 4 प्रहर की पूजा क्यों?
मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर रातभर जागकर 4 प्रहर की पूजा करने से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है. दरअसल, रात में शांति होती है, साथ ही व्यक्ति अपने अंदर के कोलाहल को भी शांत करके अपना ध्यान और आंतरिक ऊर्जा भगवान पर केंद्रित कर पाता है. साथ ही वह भगवान की भक्ति के लिए नींद का त्याग करता है. जो उसके संयम और धैर्य की परीक्षा है.
धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि की रात में जागकर की गई पूजा का कई गुना ज्यादा फल मिलता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सावन शिवरात्रि 2026 के 4 प्रहर पूजा मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04:53 बजे आरंभ होगी और 12 अगस्त को देर रात 01:52 बजे खत्म होगी. चूंकि सावन शिवरात्रि के दिन महाशिवरात्रि की तरह रात्रि के चारों प्रहर में पूजा की जाती है, जो कि 11 अगस्त की रात को ही मिल रहे हैं. इसलिए 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है. इसके 4 प्रहर पूजा मुहूर्त –
प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा- सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक
किस प्रहर में कैसी पूजा?
प्रथम प्रहर (प्रदोष काल) : रात के पहले प्रहर में सावन शिवरात्रि की रात शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें. मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-शांति और समृद्धि मिलती है.
दूसरा प्रहर (निशिथ काल का पूर्व भाग): दूसरे प्रहर में शिवलिंग पर दही अर्पित करें. ऐसा करने से धन-ऐश्वर्य मिलता है. साथ ही संतान सुख प्राप्त होता है.
तीसरा प्रहर (त्रियामा): तीसरे प्रहर में शिवलिंग पर गाय का घी अर्पित करें. ऐसा करने से बीमारियां दूर होती हैं, आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही पाप नष्ट करने और आध्यात्मिक ऊर्जा पाने के लिए भी यह कारगर है.
चौथा प्रहर (उषा काल): सुबह के इस प्रहर में शिवलिंग पर शहद या शक्कर अर्पित करें. इससे वाणी का प्रभाव और कोमलता बढ़ती है. जीवन में मिठास बढ़ती है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। जो लोग कर्ज से परेशान हैं, उन्हें इस प्रहर की पूजा में कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें.
सावन शिवरात्रि जल टाइम
सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय बहुत ज्यादा सर्च किया जाता है. कई किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद पवित्र तीर्थों से लाए गए गंगाजल को शुभ मुहूर्त में शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है. इस साल सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक की कुल अवधि सुबह 04:54 बजे से देर रात 01:52 बजे तक है. इसमें 3 शुभ मुहूर्त प्रमुख हैं.
सर्वोत्तम ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 से 06:00 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:58 बजे तक
निशिता काल (रात्रि पूजा): रात 11:59 से 12:43 बजे तक
Disclaimer-यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं व पौराणिक परंपराओं पर आधारित है.