सीतापुर में घाघराशारदा का जलस्तर बढ़ा, 40 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा; प्रशासन अलर्ट

सीतापुर में घाघराशारदा का जलस्तर बढ़ा, 40 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा; प्रशासन अलर्ट
सीतापुर में घाघराशारदा का जलस्तर बढ़ा, 40 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा; प्रशासन अलर्ट

सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में घाघरा और शारदा नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। महमूदाबाद के तहसीलदार उमाशंकर त्रिपाठी ने बताया कि विभिन्न बैराजों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण दोनों नदियों के जलस्तर में वृद्धि हुई है। बनबसा बैराज से 67,022 क्यूसेक, शारदा बैराज से 21,540 क्यूसेक और गिरिजा बैराज से 95,357 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि फिलहाल घाघरा नदी खतरे के निशान से 2.03 मीटर और शारदा नदी 1.09 मीटर नीचे बह रही है, लेकिन जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

नदी कटान से गांव का अस्तित्व खत्म

रामपुर मथुरा विकासखंड के सुंदरपुरवा गांव में घाघरा नदी की कटान से ग्रामीण धर्मराज का अंतिम मकान भी नदी में समा गया। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही पूरा गांव नदी की धारा में विलीन हो गया। प्रशासन ने प्रभावित परिवार को बांध पर जमीन उपलब्ध करा दी है और मुआवजे के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।

40 गांवों पर बाढ़ का खतरा

बेहटा विकासखंड के निर्मल पुरवा, आसाराम पुरवा, सोमवारी पुरवा, लोध पुरवा, जंगल टपरी और पासिंग पुरवा समेत करीब 40 गांवों और उनके मजरों पर बाढ़ का खतरा बना हुआ है। वहीं, मानपुर और मल्लापुर क्षेत्रों में शारदा नदी करीब 30 बीघा कृषि भूमि का कटान कर चुकी है, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन ने तैयार किए राहत केंद्र

बिसवां के तहसीलदार अनिल कुमार राम ने बताया कि संभावित बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए चार स्थानों पर अस्थायी आश्रय स्थल तैयार किए गए हैं। बाढ़ या कटान की स्थिति में प्रभावित परिवारों को तत्काल इन केंद्रों पर पहुंचाया जाएगा। लहरपुर की उप जिलाधिकारी धामिनी एस. दास ने लखनीपुर, मानपुर, मल्लापुर और खान मरौड़ गांवों का निरीक्षण कर ग्रामीणों को सतर्क रहने की अपील की।

उन्होंने लोगों से कहा कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत तहसील प्रशासन को सूचना दें। प्रशासन के मुताबिक, बाढ़ संभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए 55 नावों की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जा सकें।

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