सोना गिरवी रखकर खूब लोन ले रहे भारतीय, क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?

सोना गिरवी रखकर खूब लोन ले रहे भारतीय, क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?

देश में सोना गिरवी रखकर कर्ज लेने का चलन बीते चार साल में बेतहाशा बढ़ा है और इसकी तस्दीक खुद सरकार ने संसद में पेश आंकड़ों से की है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा गैरबैंकिंग वित्तीय कंपनियों का है, जहां गोल्ड लोन में मार्च 2022 से मार्च 2026 के बीच यानी सिर्फ चार साल में करीब 208 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान NBFCs का बकाया गोल्ड लोन 1.19 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 3.66 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, दूसरी तरफ, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का गोल्ड लोन भी तेज रफ्तार से ही बढ़ा है. मार्च 2023 में जहां यह आंकड़ा 6.15 लाख करोड़ रुपये था. वहीं, मार्च 2026 तक यह बढ़कर 14.63 लाख करोड़ रुपये हो गया. यानी करीब तीन साल में 138 प्रतिशत का उछाल आया. इन आंकड़ों से साफ है कि सोने के बदले कर्ज लेना अब आम लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों तक के लिए पैसे जुटाने का सबसे भरोसेमंद जरिया बनता जा रहा है. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। लोकसभा में वित्त मंत्रालय की ओर से पेश यह डेटा इस बात का संकेत है कि सोने की बढ़ती कीमतों और आसान शर्तों ने गोल्ड लोन को कर्ज लेने का पसंदीदा विकल्प बना दिया है.

सोना गिरवी रखकर खूब लोन ले रहे भारतीय, क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?

गोल्ड लोन का बाजार सिर्फ NBFCs तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पारंपरिक बैंकिंग सेक्टर में भी इसकी मांग जबरदस्त तरीके से बढ़ी है. सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अनुसूचित बैंकों का बकाया गोल्ड लोन मार्च 2023 के 6.15 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 14.63 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि अब गोल्ड लोन केवल छोटेमोटे कर्जदारों या ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम के भीतर एक मजबूत और तेजी से बढ़ता हुआ कर्ज सेगमेंट बन चुका है. दूसरी ओर, NBFCs का गोल्ड लोन कारोबार भी उतनी ही तेजी से फैला है. चार साल में लगभग तीन गुना बढ़ोतरी हुई है.

ग्रामीण इलाकों और MSME को मिला सहारा

सरकार का कहना है कि गोल्ड लोन ने खासतौर पर ग्रामीण इलाकों, छोटे और मझोले उद्यमों और पहली बार औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने वाले ग्राहकों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है. इससे लोगों की साहूकारों और अनौपचारिक कर्जदाताओं पर निर्भरता कम हुई है, जो पहले ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज देते थे.

सोने की कीमतों में लगातार तेजी ने भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है, क्योंकि सोने की बढ़ी हुई कीमत के चलते कर्जदारों को अपने पास मौजूद गहनों के बदले पहले से ज्यादा राशि का लोन मिल पा रहा है. इसी बीच जून 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक ने गोल्ड लोन को लेकर नए नियम भी लागू किए, जिनमें LoantoValue अनुपात, सोने के सही मूल्यांकन की प्रक्रिया और उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को और सख्त बनाया गया, ताकि इस तेजी से बढ़ते सेगमेंट में पारदर्शिता बनी रहे.

डिफॉल्ट के आंकड़े देते हैं राहत की खबर

गोल्ड लोन में इतनी तेज बढ़ोतरी के बावजूद एक राहत की बात यह है कि डिफॉल्ट के मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं देखी गई, बल्कि इसमें गिरावट ही दर्ज हुई है. बैंकों का गोल्ड लोन GNPA अनुपात मार्च 2023 के 0.19 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 0.12 प्रतिशत रह गया. वहीं NBFCs के मामले में यह गिरावट और भी बड़ी रही, जहां GNPA अनुपात इसी अवधि में 2.32 प्रतिशत से घटकर 0.81 प्रतिशत पर आ गया.

यह दिखाता है कि गोल्ड लोन लेने वाले ज्यादातर कर्जदार समय पर अपना कर्ज चुका रहे हैं. हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि RBI के पास सोने की नीलामी से जुड़ा राज्यवार या सालवार अलग डेटा उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद, कर्जदारों के हितों की रक्षा के लिए नीलामी से पहले पर्याप्त नोटिस देने, रिजर्व प्राइस तय करने और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखने जैसे नियम पहले से लागू हैं, जिनका पालन बैंकों और NBFCs को करना अनिवार्य है.

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