“हरदोई गरीब जिला है, इसलिए नहीं रुकेंगी प्रीमियम ट्रेनें?” रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी से मचा बवाल

“हरदोई गरीब जिला है, इसलिए नहीं रुकेंगी प्रीमियम ट्रेनें?” रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी से मचा बवाल
“हरदोई गरीब जिला है, इसलिए नहीं रुकेंगी प्रीमियम ट्रेनें?” रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी से मचा बवाल

हरदोई। जिले में प्रमुख ट्रेनों के ठहराव का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार विवाद की वजह पूर्व डिविजनल रेलवे यूजर्स कंसल्टेटिव कमेटी सदस्य गौरव अग्रवाल का एक दावा है। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर एक रेल अधिकारी के साथ हुई बातचीत में अधिकारी ने हरदोई में प्रीमियम ट्रेनों के ठहराव न होने के पीछे जिले की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का हवाला दिया।

गौरव अग्रवाल के अनुसार, संबंधित अधिकारी ने कथित तौर पर लिखा कि हरदोई से रेल यात्रा करने वाले अधिकांश यात्री मध्यम और निम्न आय वर्ग से हैं। इसी कारण वंदे भारत और डबल डेकर जैसी प्रीमियम ट्रेनों का यहां ठहराव रेलवे के लिए अधिक लाभकारी नहीं माना जाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकारी ने बातचीत में हरदोई के लोगों की भावनाओं का सम्मान करने की बात भी कही।

‘यह हरदोई के यात्रियों का अपमान’

पूर्व DRUCC सदस्य ने इस कथित टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि ऐसा दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है तो यह हरदोई के लाखों रेल यात्रियों का अपमान है। उनका कहना है कि किसी जिले को मिलने वाली रेल सुविधाओं का निर्धारण वहां के लोगों की आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं होना चाहिए।

ट्रेन ठहराव को लेकर फिर तेज हुई बहस

इस दावे के सामने आने के बाद हरदोई में ट्रेनों के ठहराव को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि रेलवे अधिकारियों की सोच वास्तव में ऐसी है तो वर्षों से उठाई जा रही स्थानीय मांगों पर गंभीरता से विचार कैसे होगा।

कई लोगों का मानना है कि यही वजह हो सकती है कि सांसद जयप्रकाश रावत द्वारा रेल मंत्री से मुलाकात कर विभिन्न ट्रेनों के हरदोई में ठहराव की मांग उठाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम अब तक सामने नहीं आए, जबकि अन्य स्टेशनों पर नई ट्रेनों के स्टॉपेज स्वीकृत किए गए हैं।

रेलवे की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया

फिलहाल, रेल अधिकारी की कथित टिप्पणी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही रेलवे प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह मामला रेलवे की नीतियों, समान अवसर और यात्री सुविधाओं को लेकर व्यापक बहस का विषय बन सकता है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की नजर अब रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी है। लोगों की मांग है कि हरदोई के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न हो और ट्रेनों के ठहराव से जुड़े फैसले यात्रियों की वास्तविक जरूरतों और निष्पक्ष मानकों के आधार पर लिए जाएं।

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