15 दिन, 7 कत्ल और एक साइको प्लान… कैसे नफरत में कैब ड्राइवर इंदुशेखर बन गया दरिंदा, खत्म कर दिया पूरा परिवार​

15 दिन, 7 कत्ल और एक साइको प्लान… कैसे नफरत में कैब ड्राइवर इंदुशेखर बन गया दरिंदा, खत्म कर दिया पूरा परिवार​

Bengaluru 7 Murder Inside Story: जब किसी रिश्ते की बुनियाद में प्यार और विश्वास की जगह नफरत, जलन और सनक घर बना लेती है, तो उसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है, बेंगलुरु का ये नरसंहार इसका जीताजागता और रोंगटे खड़े कर देने वाला उदाहरण है. 20 साल पहले जब कैब ड्राइवर इंदुशेखर ने सुनीता का हाथ थामा था, तब शायद किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि दो दशकों बाद वही पति एकएक कर पूरे ससुराल का नामोनिशान मिटा देगा. जिस घर में कभी खुशियां और हंसी गूंजती थी, वहीं नफरत की आग में जल रहे इंदुशेखर ने मौत का ऐसा खूनी चक्रव्यूह रचा जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया.

इंदुशेखर और सुनीता की शादी को 20 साल हो चुके थे. लेकिन वक्त बीतने के साथ इंदुशेखर के मन में एक अजीब सी चिढ़ और नफरत जन्म लेने लगी थी. उसे अपनी पत्नी सुनीता का अपने मायके वालों से लगातार जुड़ाव और बातबात पर उनका पक्ष लेना बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होता था.

खुद को ‘थाना वराडी’ नाम के अखबार का पत्रकार बताने वाला इंदुशेखर शातिर और जिद्दी मिजाज का था. जब भी पतिपत्नी में विवाद होता, सास और साले अपनी बहन का साथ देते. इंदुशेखर को लगता था कि उसकी पत्नी उसकी नहीं, बल्कि अपने परिवार की सुनती है. इसी आहत अहंकार ने उसके अंदर ‘सबको खत्म कर देने’ की खौफनाक सनक भर दी.

15 दिनों तक चलता रहा मौत का सिलसिला: हर दूसरे दिन नया शिकार

पहले पत्नी को उतारा मौत के घाट: नफरत जब अपने चरम पर पहुंची, तो उसने सबसे पहले अपनी ही पत्नी सुनीता पर हमला किया. ओखली से वार कर उसने पत्नी की जान ले ली और रिश्तेदारों के सामने बेहद बेफिक्री से झूठ बोल दिया कि ‘सुनीता दोस्तों के साथ बाहर घूमने गई है.’

एकएक कर बुलाया और मिटा दिया वजूद: पत्नी के कत्ल के बाद भी उसकी नफरत की प्यास नहीं बुझी. उसने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया. शराब पीने का झांसा देकर अपने दोनों सालों शिवकुमार और शंकर को घर बुलाया और उन्हें भी मौत की नींद सुला दिया. इसके बाद सालों की पत्नियों , अपनी सास रूपवती और अंत में महज 7 साल के मासूम बच्चे पुनीत को भी उसी ओखली से मौत के घाट उतार दिया.

ठंडे दिमाग से कत्ल, सफाई और शवों को ठिकाने लगाना

इंदुशेखर का तरीका बेहद खौफनाक था. वह हर दूसरे दिन एक कत्ल करता, शव को कार में लादकर नंदी हिल्स व चारमाडी की सुनसान पहाड़ियों में फेंक आता. वापस लौटकर ठंडे दिमाग से घर का फर्श धोता, खून के धब्बे साफ करता और फिर अगले शिकार का इंतजार करता.

नफरत के अंत की शुरुआत: एक शिकायत और टूट गया फरेब का मुखौटा

इंदुशेखर ने अपनी चालें इतनी सफाई से चली थीं कि 15 दिनों तक किसी को भनक तक नहीं लगी. लेकिन जब नलिनी अचानक गायब हुई, तो उसकी मां की शिकायत पर पुलिस हरकत में आई. पुलिस जब जांच करते हुए इंदुशेखर के किराए के मकान में पहुंची, तो भारी सफाई के बावजूद फॉरेंसिक टीम को दीवारों और फर्श के कोनों से खून के सुराग मिल गए. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। कड़ाई से पूछताछ हुई तो इंदुशेखर का फरेबी मुखौटा उतर गया और उसने अपने हाथों से की गई 7 नृशंस हत्याओं का सच उगल दिया.

चिक्कबल्लापुर के नंदी हिल्स की झाड़ियों से जब 7 साल के मासूम पुनीत का बेजान शरीर मिला, तो पुलिस वालों की आंखें भी नम हो गईं. जिस नफरत को इंदुशेखर 20 सालों से पाल रहा था, उसने न सिर्फ 7 बेगुनाहों की जिंदगी छीन ली, बल्कि खुद उसे भी सलाखों के पीछे एक खूंखार कातिल के रूप में खड़ा कर दिया.

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