
मैं डॉ. रंजन शेट्टी, स्पर्श हॉस्पिटल, बेंगलुरु में लीड कार्डियोलॉजिस्ट और मेडिकल डायरेक्टर हैं। हाल ही में मेरे पास 20 साल का एक मरीज आया, जिसे जानलेवा स्थिति वाली अनियमित दिल की धड़कन (एरिद्मिया) और बेहोशी की समस्या हुई थी। पता चला कि वह कई महीनों से जिम नहीं गया था, लेकिन हाल ही में केरल के एक फेस्टिवल में वो हिस्सा लेना चाहता था जिसके लिए वो खुद को फिट करना चाहता था। अपनी परफॉर्मेंस से पहले खुद को फिट करने के लिए उसने अचानक दोबारा बहुत ज्यादा और हार्ड एक्सरसाइज करना शुरू कर दी। वो करीब दो घंटे तक स्ट्रोंग वर्कआउट करने लगा। उसी शाम उसने देखा कि उसके पेशाब का रंग गहरे कोला जैसा हो गया है। उसने इसे नजरअंदाज किया और सो गया। लेकिन कुछ समय बाद उसका दिल तेज धड़कने लगा और उसे चक्कर आने लगा और उसकी नींद खुल गई। लड़के को यूरिन की परेशानी और हार्ट बीट तेज होने की ये दिक्कत रैबडोमायोलिसिस की वजह से हुई थी।
रैबडोमायोलिसिस क्या है?
रैबडोमायोलिसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें मांसपेशियां गंभीर रूप से टूटने लगती हैं और उनका अंदरूनी पदार्थ रक्तप्रवाह में पहुंच जाता है। यह समस्या बहुत आम नहीं है, लेकिन गंभीर होने पर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है। इतना ही नहीं ये किडनी और दिल तक की सेहत को बिगाड़ सकती है। यह परेशानी अक्सर अचानक बहुत ज्यादा या सख्त एक्सरसाइज करने के कारण हो सकती है। Also Readरात में हल्दी का दूध पीने से सेहत को कौन-कौन से होते हैं फायदे, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट और डॉक्टर से जानिए
मांसपेशियों के टूटने पर उनके अंदर मौजूद पदार्थ रक्तप्रवाह में पहुंचने लगता हैं। इनमें से एक पदार्थ मायोग्लोबिन है। यह लाल रंग का प्रोटीन होता है, जो आमतौर पर मांसपेशियों की कोशिकाओं के अंदर रहता है। जब इसकी बड़ी मात्रा पेशाब में पहुंचती है, तो पेशाब का रंग गहरा भूरा, लाल या कोला जैसा हो सकता है। पेशाब के रंग में इस तरह का अचानक और असामान्य बदलाव इस बात का संकेत हो सकता है कि यह सामान्य वर्कआउट के बाद होने वाली मांसपेशियों के दर्द से कहीं ज्यादा गंभीर समस्या है। Also Readकब्ज और गैस से परेशान हैं? डाइट में शामिल करें करेला, एक्सपर्ट से जानिए कैसे ये सब्जी पाचन के लिए साबित होती है अमृत
मांसपेशियों की समस्या कैसे दिल को कर सकती है प्रभावित ?
मांसपेशियों के गंभीर रूप से टूटने पर ब्लड में पोटैशियम की मात्रा काफी बढ़ सकती है। आमतौर पर किडनी शरीर से अतिरिक्त पोटैशियम को बाहर निकालने में मदद करती है। लेकिन मांसपेशियों को बहुत ज्यादा नुकसान होने पर शरीर के लिए पोटैशियम का संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब किडनी की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो गई हो। अगर रक्त में पोटैशियम का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो यह दिल की विद्युत गतिविधि को प्रभावित कर सकता है। इसकी वजह से दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है, जिसे एरिद्मिया कहा जाता है। गंभीर मामलों में यह स्थिति कार्डियक अरेस्ट तक पहुंच सकती है। इसलिए रैबडोमायोलिसिस में दिल को होने वाला खतरा खासतौर से शरीर में गंभीर मेटाबॉलिक और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण दिल की विद्युत गतिविधि बिगड़ने से जुड़ा होता है, न कि सामान्य हार्ट अटैक से।
रैबडोमायोलिसिस और हार्ट अटैक क्या एक जैसी स्थिति हैं?
रैबडोमायोलिसिस और हार्ट अटैक एक जैसी स्थिति नहीं हैं, इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर समझना जरूरी है। हार्ट अटैक आमतौर पर तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी कोरोनरी धमनी में रुकावट आ जाती है। इससे दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। जबकि रैबडोमायोलिसिस की शुरुआत शरीर के किसी दूसरे हिस्से की मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंचने से होती है। इसमें दिल से जुड़ी समस्या इसलिए पैदा हो सकती है क्योंकि क्षतिग्रस्त मांसपेशियों से निकलने वाले पदार्थ, खासकर पोटैशियम, दिल की विद्युत प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए रैबडोमायोलिसिस से जुड़ा कार्डियक अरेस्ट हो सकता है, भले ही व्यक्ति को हार्ट अटैक न आया हो।
अचानक बहुत ज्यादा और कड़ी एक्सरसाइज क्यों हो सकती है खतरनाक?
एक्सरसाइज अपने आप में नुकसानदायक नहीं है। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वास्तव में, नियमित शारीरिक गतिविधि दिल और पूरे शरीर की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। समस्या तब पैदा होती है जब कोई व्यक्ति कई महीनों तक कम या बिल्कुल एक्सरसाइज न करने के बाद अचानक बहुत कठिन वर्कआउट शुरू कर देता है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से बॉडी को एक्टिव नहीं रखता और किसी कार्यक्रम या प्रतियोगिता के लिए अचानक बहुत ज्यादा ट्रेनिंग शुरू कर देता है, तो उसकी मांसपेशियों को उस स्तर की मेहनत के अनुकूल होने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। आपको बता दूं कि एक्सरसाइज की तीव्रता, उसका समय या मात्रा में अचानक बढ़ोतरी मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। बहुत ज्यादा मेहनत के साथ अगर शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो या व्यक्ति बहुत गर्म मौसम में कड़ी एक्सरसाइज करे, तो रैबडोमायोलिसिस का खतरा और बढ़ सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर बहुत ज्यादा मांसपेशियों में दर्द या सूजन के साथ बॉडी में कुछ लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए
- मांसपेशियों में तेज दर्द या सूजन
- बहुत ज्यादा कमजोरी
- असामान्य या अत्यधिक थकान
- पेशाब का गहरा भूरा या कोला जैसा रंग
- पेशाब की मात्रा में स्पष्ट कमी
ऐसे लक्षणों के अपने आप ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए ऐसे में तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
लंबे ब्रेक के बाद दोबारा एक्सरसाइज कैसे शुरू करें?
अगर आप लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं तो कुछ ही दिनों में कई महीनों की कमी पूरी करने की कोशिश नहीं करें। दोबारा वर्कआउट शुरू करते समय आप
- धीरे-धीरे शुरुआत करें।
- वर्कआउट की अवधि धीरे-धीरे बढ़ाएं।
- एक्सरसाइज की तीव्रता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाएं।
- मांसपेशियों को पर्याप्त आराम और रिकवरी का समय दें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- बहुत गर्म मौसम में अत्यधिक मेहनत वाली एक्सरसाइज करने से बचें।
- दिल, किडनी और मांसपेशियों तीनों को उस मेहनत का सामना करना पड़ता है जो हम शरीर से करवाते हैं। वर्कआउट का उद्देश्य शरीर को मजबूत बनाना होना चाहिए, न कि किसी गंभीर चेतावनी संकेत को नजरअंदाज करके अगली सुबह तक इंतजार करना।