उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं. खासकर पश्चिमी यूपी में राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं. इसी बीच नेताओं के दल बदलने का सिलसिला भी लगातार चर्चा में है. कैराना से लेकर सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर तक कई ऐसे चेहरे सामने आए हैं, जो कुछ समय पहले तक एक पार्टी के साथ थे और अब दूसरे राजनीतिक दल में नजर आ रहे हैं.

इन बदलावों में पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, लोकसभा चुनाव लड़ चुके नेता और राजनीतिक परिवारों से जुड़े चेहरे शामिल हैं. दिलचस्प बात यह भी है कि कुछ नेता ऐसे हैं जो पहले अलगअलग दलों में रह चुके हैं और अब एक बार फिर नया राजनीतिक ठिकाना तलाश रहे हैं.
बसपा से सपा पहुंचे श्रीपाल राणा
हालिया बड़े बदलावों में कैराना के श्रीपाल राणा का नाम प्रमुख है. 2024 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर कैराना से चुनाव लड़ने वाले श्रीपाल राणा अगस्त 2026 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. 2024 के लोकसभा चुनाव में श्रीपाल राणा का मुकाबला सपा की उम्मीदवार इकरा हसन से था. अब दोनों एक ही राजनीतिक दल में हैं. श्रीपाल राणा का सपा में शामिल होना कैराना की राजनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि वह पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा के उम्मीदवार थे और अब सपा संगठन का हिस्सा हैं.
इमरान मसूद के परिवार में भी बदला राजनीतिक रास्ता
सहारनपुर में भी अगस्त में राजनीतिक बदलाव देखने को मिला. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद ने कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया. 20 अगस्त को लखनऊ में अखिलेश यादव ने उन्हें सपा की सदस्यता दिलाई. शायान मसूद के सपा में जाने के बाद सहारनपुर की राजनीति में इसकी चर्चा तेज हुई. राजनीतिक रूप से यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि शायान मसूद का जुड़ाव इमरान मसूद के परिवार से है, जबकि इमरान मसूद खुद कांग्रेस के सांसद हैं.
शायान ने सपा में शामिल होने के बाद अपने राजनीतिक फैसले की वजह भी बताई थी और कहा था कि 2027 के चुनाव में बीजेपी को रोकने के लिए फिलहाल सपा को लेकर उन्होंने अपना रुख तय किया है. यह उनका राजनीतिक फैसला है.
अमीर आलम और नवाजिश ने आजाद समाज पार्टी छोड़ी, कांग्रेस में शामिल
पश्चिमी यूपी में सबसे ताजा बड़े बदलावों में पूर्व सांसद अमीर आलम और उनके बेटे, पूर्व विधायक नवाजिश आलम का नाम शामिल है. दोनों ने आजाद समाज पार्टी छोड़ने के बाद 23 सितंबर को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. इस दौरान उनके साथ समर्थक भी मौजूद रहे. अमीर आलम पश्चिमी यूपी की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं. ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। वह विधायक, मंत्री, कैराना से सांसद और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं. वहीं उनके बेटे नवाजिश आलम 2012 में बुढ़ाना से सपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे.
अमीर आलम और नवाजिश की राजनीतिक यात्रा में कई दलों का पड़ाव रहा है. पितापुत्र पहले सपा और आरएलडी से भी जुड़े रहे और बाद में आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए. अब दोनों ने कांग्रेस का रुख किया है.
आदित्य प्रकाश वर्मा: पार्टी में आए, प्रभारी बने और फिर इस्तीफा
दलबदल की इस कड़ी में पूर्व आईपीएस अधिकारी आदित्य प्रकाश वर्मा का घटनाक्रम भी सामने आया. जुलाई 2026 में वह आजाद समाज पार्टी में शामिल हुए थे. इसके बाद उन्हें हाथरस सदर सुरक्षित सीट का प्रभारी बनाया गया और पार्टी ने उन्हें संभावित प्रत्याशी के तौर पर भी आगे किया था. हालांकि, अगस्त में आदित्य प्रकाश वर्मा ने आजाद समाज पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने फैसले के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए थे.
पश्चिमी यूपी में बदलते राजनीतिक समीकरण
इन घटनाक्रमों को ऐसे समय देखा जा रहा है जब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल संगठन विस्तार और चुनावी तैयारियों में जुटे हैं. पश्चिमी यूपी में कैराना, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे इलाकों की राजनीति में स्थानीय नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है. एक तरफ राजनीतिक दल संभावित गठबंधन और सीटों के समीकरण पर काम कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेता भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अलगअलग विकल्प तलाश रहे हैं.