
अयोध्या, अमृत विचार : राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में 10 बेड के डायलिसिस यूनिट के टेंडर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। करीब चार करोड़ के टेंडर में अनियमितताओं, गुपचुप तरीके से एमओयू जैसे संगीन आरोप लगने व मुख्यमंत्री दरबार तक मामला पहुंचने के बाद भी मेडिकल कॉलेज प्रशासन प्रकरण से अभी अनजान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने 10 जुलाई को एक शिकायत का संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन 10 अगस्त तक यह पत्र मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंच सका है। ईमेल व कोरियर के जमाने में भी यह पत्र 30 दिन में करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय नहीं कर सका है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मर्तोलिया ने इस बात की पुष्टि की है कि उन्हें अभी तक किसी भी तरह के आधिकारिक जांच की सूचना की जानकारी नहीं है। न ही किसी तरह की लिखित शिकायत आई है। वहीं दूसरी तरफ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता व शिकायतकर्ता जितेन्द्र कुमार का कहना है कि प्राचार्य को पूरे मामले की जानकारी है।
टेंडर निरस्त करने और वित्तीय जांच की मांग
उन्होंने मुख्यमंत्री को आठ बिंदुओं पर पत्र भेजकर शिकायत की थी। मांग की थी कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा सीएसआर मद में स्वीकृत 3.94 करोड़ रुपये की डायलिसिस परियोजना हेतु सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति, प्रशासनिक अनुमोदन एवं जेम पोर्टल पर प्रकाशित निविदा संख्या की वैधता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। ये खबर आप क्विक समाचार में पढ़ रहे हैं। साथ ही यह भी जांच कराई जाए कि एमओयू की अवधि एवं शर्तों के अनुरूप कार्रवाई की गई है अथवा नहीं। यदि निविदा प्रक्रिया एमओयू की भावना, शर्तों अथवा समयसीमा के विपरीत पाई जाए तो संभावित वित्तीय अनियमितता एवं किसी विशिष्ट पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका को दृष्टिगत रखते हुए निविदा को तत्काल निरस्त किया जाए।
10 जुलाई को दिए गए थे जांच के निर्देश
डायलिसिस परियोजना आधारित एमओयू उपकरण क्रय, स्थापना एवं संबंधित समस्त प्रशासनिक अनुमोदनों की वैधता की जांच कराई जाए। आवश्यकता पड़ने पर समस्त वित्तीय लेनदेन, भुगतान, निविदा प्रक्रिया, अनुबंधों एवं संबंधित अभिलेखों का फॉरेंसिक वित्तीय ऑडिट भी कराया जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय एवं विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोक भवन पहुंची शिकायत का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने 10 जुलाई को एसीएस चिकित्सा शिक्षा से जांच उपरांत समुचित कार्रवाई की अपेक्षा की थी। जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई होने की जानकारी नहीं है।