7 दिन पर इंजेक्शन लेने से कम होगा डायबिटीज, कितनी कारगर है ‘अवीक्ली’.. 5 सवाल और उसके जवाब

7 दिन पर इंजेक्शन लेने से कम होगा डायबिटीज, कितनी कारगर है ‘अवीक्ली’.. 5 सवाल और उसके जवाब

डायबिटीज के इलाज में लंबे समय बाद एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में Awiqli नाम की सप्ताह में एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन लॉन्च की है. कंपनी का दावा है कि अब कई मरीजों को रोजाना इंसुलिन लेने की बजाय सिर्फ 7 दिन में एक बार इंजेक्शन लगवाना होगा. हालांकि यह कोई वैक्सीन नहीं, बल्कि लॉन्गएक्टिंग बेसल इंसुलिन है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कितनी कारगर है, किन मरीजों के लिए है और क्या हर डायबिटीज मरीज इसे ले सकता है? आइए 5 FAQ के जरिए इन सभी प्रश्नों का उत्तर देने की कोशिश करते हैं.

7 दिन पर इंजेक्शन लेने से कम होगा डायबिटीज, कितनी कारगर है ‘अवीक्ली’.. 5 सवाल और उसके जवाब

सवाल 1 Awiqli क्या है? क्या यह डायबिटीज की वैक्सीन है?

जवाब नहीं, Awiqli कोई वैक्सीन नहीं है. यह सप्ताह में एक बार दी जाने वाली बेसल इंसुलिन है. बेसल इंसुलिन शरीर में पूरे दिन और रात धीरेधीरे काम करती है और भोजन के बीच तथा सोते समय ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करती है. अब तक ऐसी इंसुलिन ज्यादातर मरीजों को रोज लगानी पड़ती थी, जबकि Awiqli को सिर्फ सप्ताह में एक बार लेने के लिए विकसित किया गया है.

सवाल 2 यह कितनी कारगर साबित हुई है?

जवाब कंपनी के क्लीनिकल ट्रायल में Awiqli ने ब्लड शुगर नियंत्रित करने में अच्छे परिणाम दिए. इससे मरीजों का HbA1c यानी पिछले तीन महीने का औसत ब्लड शुगर स्तर प्रभावी ढंग से कम हुआ. कई मरीजों का HbA1c 7% से नीचे पहुंचा, जिसे डायबिटीज नियंत्रण का अच्छा लक्ष्य माना जाता है. इसकी सुरक्षा भी रोजाना दी जाने वाली बेसल इंसुलिन के समान पाई गई.

सवाल 3 किन मरीजों को इसका फायदा मिलेगा?

जवाब Awiqli को टाइप1 और टाइप2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए विकसित किया गया है. टाइप1 डायबिटीज में इंसुलिन जीवनभर जरूरी होती है, जबकि टाइप2 डायबिटीज में जब खानपान, व्यायाम और दवाओं से शुगर नियंत्रित नहीं होती, तब इंसुलिन की जरूरत पड़ती है. सप्ताह में एक बार इंजेक्शन लेने से रोजाना इंजेक्शन लगाने की परेशानी कम हो सकती है. हालांकि कुछ मरीजों को भोजन के बाद लगने वाली शॉर्टएक्टिंग इंसुलिन पहले की तरह जारी रखनी पड़ सकती है.

सवाल 4 क्या हर मरीज इसके लिए उपयुक्त है?

जवाब नहीं. डॉक्टरों का कहना है कि यह इंसुलिन हर मरीज के लिए सही नहीं हो सकती. रोजाना वाली इंसुलिन से सप्ताह में एक बार वाली इंसुलिन पर शिफ्ट करते समय सही डोज तय करना बेहद जरूरी है. शुरुआत के कुछ सप्ताह में ब्लड शुगर की नियमित जांच और डॉक्टर की निगरानी जरूरी रहती है, क्योंकि हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा हो सकता है.

सवाल 5 क्या इससे डायबिटीज पूरी तरह खत्म हो जाएगी?

जवाब नहीं, Awiqli डायबिटीज का स्थायी इलाज नहीं है. इसका उद्देश्य ब्लड शुगर को लंबे समय तक बेहतर तरीके से नियंत्रित रखना है. अच्छी डाइट, नियमित व्यायाम, समयसमय पर ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर की सलाह के साथ इसका इस्तेमाल किया जाए तो इलाज पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हो सकता है.

भारत के लिए क्यों अहम है यह नई इंसुलिन?

भारत में डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अनुसार, देश में 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज और करीब 13.6 करोड़ लोग प्रीडायबिटीज से प्रभावित हैं. ऐसे में सप्ताह में सिर्फ एक बार लगने वाली इंसुलिन उन मरीजों के लिए राहत बन सकती है जिन्हें रोज इंजेक्शन लेने में परेशानी होती है. हालांकि एक्सपर्ट की सलाह है कि मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के अपनी मौजूदा इंसुलिन बंद या बदलने की गलती बिल्कुल न करें.

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