अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 8 साल बाद हुए छात्रसंघ चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं. अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की है. नोमान अशरफ को कुल 7,797 वोट मिले, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी मोहम्मद इंतखाब को 4121 वोटों के बड़े अंतर से हराया. मोहम्मद इंतखाब को3,676 वोट मिले. वहीं, उपाध्यक्ष पद पर नसरा नईम ने 7,091 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. नसरा इस पद के लिए चुनी जाने वाली पहली महिला हैं.

AMU में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. पिछले महीने यासिर फहाद की 19 दिन की भूख हड़ताल के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव कराने का फैसला लिया था. छात्रसंघ चुनाव के लिए 5 नवंबर को मतदान हुआ था, और देर शाम वोटों की गिनती शुरू की गई थी. यूनिवर्सिटी ने विमेंस कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के लिए भी अलग से चुनाव कराए.
35 पदों के लिए 145 प्रत्याशी मैदान में थे
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में करीब 35 पदों के लिए लगभग 145 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे. AMU छात्रसंघ चुनाव में 20हजार मतदाता हैं, जबकि विमेंस कॉलेज यूनियन में करीब 4,500 छात्राएं हैं. इस तरह दोनों चुनावों में लगभग 25,500 मतदाताओं हुए, इनमें छात्रसंघ चुनाव में 15000 से ज्यादा वोट पड़े और विमेंस कॉलेज यूनियन के लिए कुल 2554 छात्राओं ने वोट डाला.
दोनों यूनियनों के लिए अलगअलग मतदान व्यवस्था की गई थी.छात्रसंघ के तीन प्रमुख पदों पर 19 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला था. अध्यक्ष पद पर 9, उपाध्यक्ष पर 7 और मानद सचिव पद पर 3 प्रत्याशी मैदान में थे. अध्यक्ष नोमान अशरफ, उपाध्यक्ष नसरा नईम के अलावा मानद सचिव के पद पर पर मोहम्मद हमदान 8,385 वोटों के साथ निर्वाचित हुए.
वीमेंस कॉलेज में अनम रियाज अध्यक्ष बनीं
यूनिवर्सिटी ने विमेंस कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के लिए भी अलग से चुनाव कराए, इसके नतीजे भी घोषित हो गए हैं. वीमेंस कॉलेज में अनम रियाज अध्यक्ष चुनी गई हैं. अनम रियाज को 806 वोट जबकि उनके प्रतिद्वंदी आयशा जमाल को 635 मत मिले. वहीं, उपाध्यक्ष पद पर यश खान और मरियम जान ऑनरेरी सेक्रेटरी चुनी गईं. चुनाव में कुल 4,500 छात्राओं में 62.05% ने मतदान किया.
इसके अलावा, विमेंस कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन चुनाव में आठ कैबिनेट सदस्य भी चुने गए, जिससे नए यूनियन में सदस्यों की संख्या 11 हो गई. इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें में राष्ट्रीय दलों की बजाय क्षेत्रीय लॉबियों का दबदबा रहा. अब देखना होगा कि नई यूनियन विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने छात्रों की आवाज कितनी मजबूती से उठा पाती है